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इसरो ने साफ किया: निजीकरण नहीं, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी

6/9/2026, 6:05:24 am
इसरो ने साफ किया: निजीकरण नहीं, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी
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इसरो ने सोमवार को एक आधिकारिक बयान जारी करके साफ कर दिया कि उसका निजीकरण नहीं किया जाएगा और उसकी रणनीतिक अहमियत बनी रहेगी। बयान में कहा गया कि सरकार निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना चाहती है ताकि अंतरिक्ष क्षेत्र में नवाचार तेज हो और लागत कम हो। बयान के अनुसार, निजी क्षेत्र को उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण सेवाओं और ग्राउंड‑सेगमेंट तकनीक में शामिल किया जाएगा। इसरो अपनी परीक्षण सुविधाएं, डेटा स्टेशन और लॉन्च पैड जैसी संपत्तियां साझा करेगा, जिससे स्टार्टअप और स्थापित कंपनियों को विकास खर्च घटाने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे भारत का अंतरिक्ष बजट पर दबाव कम होगा और सालाना अधिक मिशन पूरे किए जा सकेंगे। उदाहरण के लिए, छोटे उपग्रहों की बढ़ती मांग पूरी करने के लिए निजी लॉन्च वाहनों का उपयोग हो सकता है, जबकि इसरो अपने भारी‑पेलोड रॉकेट पर ध्यान केंद्रित रखेगा। इसरो ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी भागीदारी बढ़ने से उसके सार्वजनिक कर्तव्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। चंद्रमा, मंगल और अन्य रणनीतिक अभियान पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रहेंगे। निजी क्षेत्र की भूमिका पूरक होगी, प्रतिस्थापक नहीं। इस स्पष्टीकरण के बाद उद्योग जगत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और कई स्टार्टअप ने इसरो के साथ समझौते की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में अग्रणी बनाना है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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