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इसरो के सैटेलाइट डेटा से शहरों का नया मास्टर प्लान

15/9/2026, 1:38:26 am
इसरो के सैटेलाइट डेटा से शहरों का नया मास्टर प्लान
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केंद्र सरकार ने तय किया है कि देश के प्रमुख शहरों के मास्टर प्लान इसरो के सैटेलाइट और ड्रोन डेटा से बनाए जाएंगे। अभी तक अधिकांश प्लान पुराने सर्वेक्षणों और हाथ से जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित हैं। इससे जमीन का वास्तविक उपयोग, ऊंचाई‑ढलान, जल निकासी और हरित क्षेत्र का सही चित्र नहीं मिल पाता। नतीजतन अनियोजित निर्माण बढ़ता है और बुनियादी ढांचे में देरी होती है। इसरो के पास हाई‑रिजॉल्यूशन सैटेलाइट और ड्रोन से मिलने वाला सटीक डेटा है। इस डेटा को जीआईएस प्लेटफॉर्म पर लाकर लेयर‑दर‑लेयर विश्लेषण किया जाता है। इससे मौजूदा भवनों, सड़कों, नालियों और खाली जगहों की स्थिति स्पष्ट हो जाती है। प्लानर इस जानकारी के आधार पर डिजिटल ट्विन मॉडल बनाते हैं, जिसमें भविष्य की आबादी, ट्रैफिक, पानी और बिजली की मांग का अनुमान लगाया जा सकता है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अहमदाबाद, लखनऊ और कोच्चि में यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वहां सैटेलाइट इमेज को डिजिटल मैप पर ओवरले करके अवैध निर्माण, अतिक्रमण और जोनिंग उल्लंघन तुरंत पहचाने जा रहे हैं। सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अपने शहरी निकायों को इस प्रणाली से जोड़ें। इसके लिए इसरो के राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र (एनआरएससी) और राज्य स्तर की रिमोट सेंसिंग एजेंसियों के बीच समझौते होंगे। एक राष्ट्रीय पोर्टल भी बनेगा, जहां योजनाकार, इंजीनियर और आम नागरिक आधार‑स्तरीय डेटा देख सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ेगी और योजनाएं जमीन पर उतरेंगी। चुनौती यह है कि कई स्थानीय निकायों के पास तकनीकी दक्षता और प्रशिक्षित कर्मचारी कम हैं। इसलिए क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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