लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

जन्माष्टमी पर पुरी जगन्नाथ मंदिर पांच घंटे बंद, भगवान निभाएंगे मां की भूमिका

4/9/2026, 3:11:34 am
जन्माष्टमी पर पुरी जगन्नाथ मंदिर पांच घंटे बंद, भगवान निभाएंगे मां की भूमिका
Original publisher image
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर ओडिशा के पुरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर पांच घंटे के लिए अपने दरवाज़े बंद रखेगा। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, बंदी का समय सुबह छह बजे से ग्यारह बजे तक निर्धारित किया गया है। इस दौरान गर्भगृह में भगवान जगन्नाथ को विशेष वस्त्र पहनाए जाएंगे, जिसमें वे मातृ रूप में दिखाई देंगे। इस परंपरा को स्थानीय भाषा में “माँ जगन्नाथ seva” कहा जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य भक्तों, विशेषकर शिशुओं और छोटे बच्चों की रक्षा, पोषण और आशीर्वाद प्रदान करना है। पुजारियों का मानना है कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अवसर पर जगन्नाथ भी मातृत्व का स्वरूप धारण कर अपने भक्तों को माता की तरह प्यार और सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसी विश्वास के चलते मंदिर के पुजारियों को इस अवधि में deity की पोशाक बदलने, अभिषेक करने और विशेष mantras का उच्चारण करने का समय मिलता है। कहा जाता है कि इस रूप में भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि लाते हैं। इस tradición की उत्पत्ति कई शताब्दियों पुरानी है। इतिहासकारों का कहना है कि गजापति राजाओं के शासनकाल में इस rituaal की शुरुआत हुई थी, जब राजकुमारों के जन्म पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता था। समय के साथ यह परंपरा सार्वजनिक हो गई और आज हर वर्ष जन्माष्टमी पर लाखों भक्त इस विशेष दर्शन के लिए पुरी पहुंचते हैं। मंदिर बंद रहने के दौरान बाहर भक्तों के लिए प्रसाद वितरण और भजन-कीर्तन की व्यवस्था की जाती है ताकि उनके धार्मिक उत्साह में कोई कमी न आए। मंदिर प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि बंदी केवल गर्भगृह तक सीमित रहेगी और मंदिर परिसर के अन्य भाग जैसे अनौसध भंडार, प्रसाद काउंटर और भक्त सुविधा केंद्र सामान्य रूप से खुले रहेंगे। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के मद्देनजर अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। इस प्रकार, जन्माष्टमी पर पांच घंटे की यह बंदी न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि जीवित सांस्कृतिक परंपरा को संरक्षित करने का भी एक तरीका है। भक्तों का मानना है कि इस विशेष दर्शन से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है और भगवान जगन्नाथ की मातृ कृपा हमेशा उनके साथ रहती है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित