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काबुल के 'महाविनायक': 1956 में गर्देज़ में मिला प्राचीन गणपति

20/9/2026, 9:24:57 am
काबुल के 'महाविनायक': 1956 में गर्देज़ में मिला प्राचीन गणपति
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1956 में भारतीय पुरातत्व विभाग का एक दल अफ़ग़ानिस्तान गया था। दल में दो वरिष्ठ अधिकारी टीएन रामचंद्रन और वाईडी शर्मा शामिल थे। दोनों ने काबुल से लगभग 120 किलोमीटर दूर गर्देज़ शहर में खुदाई के दौरान एक पत्थर की मूर्ति बरामद की। मूर्ति लगभग सातवीं शताब्दी की है और इसमें गणेश की चार भुजाएं स्पष्ट दिखाई देती हैं। स्थानीय लोग इसे 'महाविनायक' नाम से पुकारते हैं। मूर्ति की ऊंचाई करीब 90 सेंटीमीटर है और इसकी सतह पर बारीक नक्काशी की गई है। कलात्मक शैली में भारतीय गुप्तकालीन प्रभाव के साथ‑साथ मध्य एशियाई तत्व भी मिलते हैं। दोनों अधिकारियों ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट नई दिल्ली स्थित पुरातत्व सर्वेक्षण मुख्यालय में जमा की। रिपोर्ट में मूर्ति की माप, सामग्री, शैली और संभावित ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का वर्णन है। खोज से पता चलता है कि प्राचीन काल में भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच सांस्कृतिक और व्यापारिक संपर्क बहुत गहरे थे। बौद्ध और हिंदू कला का यह संगम गर्देज़ क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। बाद में मूर्ति को काबुल के राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया। 1970 के दशक में गृहयुद्ध और लूटपाट के दौरान संग्रहालय को नुकसान पहुँचा, फिर भी मूर्ति बच गई। वर्तमान में यह शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अब इसकी सटीक प्रतिकृति तैयार करने पर विचार कर रहा है ताकि मूल मूर्ति की रक्षा सुनिश्चित हो सके। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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