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कैलाश मानसरोवर यात्रा: तिब्बत रूट की मुश्किलें और ताज़ा बाढ़ का असर

27/8/2026, 11:20:13 am
कैलाश मानसरोवर यात्रा: तिब्बत रूट की मुश्किलें और ताज़ा बाढ़ का असर
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कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदुओं, बौद्धों और जैनियों के लिए सबसे पवित्र तीर्थों में एक है। हर साल हजारों श्रद्धालु तिब्बत के रास्ते से पहाड़ों को पार करके मानसरोवर झील और कैलाश पर्वत तक पहुंचते हैं। यह रास्ता नेपाल के सिमिकोट से शुरू होकर तिब्बत की सीमा में दाखिल होता है और फिर ऊंचे दर्रे, संकरे पहाड़ी रास्ते और बर्फीले मैदानों से गुजरता है। रास्ते की सबसे बड़ी मुश्किल ऊंचाई है। 4,500 मीटर से ऊपर की हवा में ऑक्सीजन कम होती है, जिससे सिरदर्द, उल्टी और थकान आम बात है। मौसम अचानक बदल जाता है – तेज़ हवा, बर्फबारी और ओले बिना चेतावनी के आते हैं। पहाड़ी इलाके में भूस्खलन और चट्टान गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है। सड़कें कच्ची हैं, कई जगह केवल पैदल या घोड़े पर ही जाया जा सकता है। मेडिकल सुविधाएं दूर हैं, इसलिए गंभीर बीमार को तुरंत अस्पताल पहुंचाना लगभग असंभव होता है। सीमा पर चीनी अधिकारियों की अनुमति और कागजी कार्रवाई भी समय लेती है। पिछले हफ्ते नेपाल के हुमला ज़िले में तिब्बत की ओर से आई भारी बारिश ने नदियों को उफान पर ला दिया। बाढ़ ने कई गांवों को बहा दिया और सड़कें टूट गईं। प्रशासन के मुताबिक करीब तीन सौ लोग लापता हैं, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले कम से कम पचास तीर्थयात्री भी शामिल हैं। उनके परिवार वाले अब भी सूचना का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय दूतावास और नेपाली सेना ने संयुक्त बचाव अभियान शुरू किया है। हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री गिराई जा रही है और खोजी दल पैदल ही दुर्गम इलाकों में जा रहे हैं। चीनी पक्ष ने भी सीमा चौकियों पर सहायता शिविर लगाए हैं, लेकिन खराब मौसम और टूटी सड़कों के कारण पहुंचना धीमा है। यात्रा पर जाने वालों को अब कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। पहले से ही ऊंचाई पर अभ्यस्त होने के लिए कुछ दिन आराम करें। मौसम की जानकारी लगातार देखें और स्थानीय गाइड की सलाह मानें। अपने साथ पर्याप्त दवा, गर्म कपड़े और सूखा राशन रखें। बीमा पॉलिसी में ऊंचाई और प्राकृतिक आपदा कवर होना ज़रूरी है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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