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कराची का हिंदू जिमखाना: सौ साल पुरानी इमारत पर किसका हक?

7/9/2026, 2:04:17 am
कराची का हिंदू जिमखाना: सौ साल पुरानी इमारत पर किसका हक?
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कराची का हिंदू जिमखाना आज फिर चर्चा में है। करीब सौ साल पहले शहर के हिंदू समुदाय ने इस इमारत को बनवाया था। 1920 के दशक में बनी इस दोमंजिला इमारत में कभी खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक बैठकें हुआ करती थीं। बंटवारे के बाद हिंदू परिवार पलायन कर गए, लेकिन इमारत वहीं खड़ी रही। 1980 के दशक में तत्कालीन सैन्य शासक जनरल जिया उल हक ने इसे गिराने का आदेश दिया था। उनका तर्क था कि यह गैर-इस्लामी ढांचा है। मगर तब स्थानीय नागरिकों और विरासत प्रेमियों के विरोध के चलते कार्रवाई रुक गई। इमारत बच गई, मगर उसकी देखभाल का जिम्मा किसी ने नहीं लिया। आज यह इमारत कराची के सरदार जहांगीर रोड पर खड़ी है। इसके एक हिस्से में नेशनल एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (नापा) चलता है। बाकी हिस्सा खाली पड़ा है। जर्जर दीवारें, टूटी खिड़कियां और उखड़ा प्लास्टर इसकी हालत बयां करते हैं। विवाद की जड़ मालिकाना हक है। पाकिस्तान की इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) का कहना है कि यह उसकी संपत्ति है। वहीं नापा प्रबंधन लंबी लीज का दावा करता है। स्थानीय हिंदू समुदाय के प्रतिनिधि कहते हैं कि यह उनकी विरासत है, उन्हें वापस मिलनी चाहिए। अदालत में मामला लंबित है। विरासत विशेषज्ञों का मानना है कि यह इमारत कराची के बहुसांस्कृतिक अतीत की निशानी है। इसे संग्रहालय या सांस्कृतिक केंद्र में बदला जा सकता है। मगर इसके लिए स्पष्ट मालिकाना हक और धन दोनों चाहिए। फिलहाल इमारत खामोश खड़ी है — इतिहास की गवाह, भविष्य की राह तकती। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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