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कर्नाटक हाईकोर्ट ने बंगलूरू पुलिस की कार्रवाई पर सख़्ती दिखाई: मोहन गौड़ा को उडुपी से क्यों लाया गया?

29/8/2026, 9:02:40 pm
कर्नाटक हाईकोर्ट ने बंगलूरू पुलिस की कार्रवाई पर सख़्ती दिखाई: मोहन गौड़ा को उडुपी से क्यों लाया गया?
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने शनिवार को बंगलूरू पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने पूछा कि हिंदू संगठन के नेता मोहन गौड़ा को उडुपी से बंगलूरू क्यों लाया गया जबकि उनके खिलाफ स्थानीय स्तर पर कोई केस दर्ज नहीं था। न्यायमूर्ति एस. के. शेट्टी ने कहा कि पुलिस को गिरफ्तारी का ठोस आधार बताना होगा। पुलिस ने दावा किया कि गौड़ा के खिलाफ बंगलूरू में दर्ज एक मामले में संलिप्तता है। लेकिन अदालत ने सवाल किया कि जब मामला बंगलूरू में है तो उडुपी से गिरफ्तारी की जरूरत क्यों पड़ी। जज ने यह भी कहा कि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को सबूत के तौर पर पेश किया पर उसकी प्रमाणिकता पर संदेह है। वकील ने अदालत को बताया कि फुटेज में समय और स्थान की जानकारी स्पष्ट नहीं है। कैमरे की गुणवत्ता और रिकॉर्डिंग की निरंतरता पर भी सवाल उठे हैं। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि मूल फुटेज और उसकी चेन ऑफ कस्टडी अगली सुनवाई तक पेश करे। मोहन गौड़ा के वकील ने कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है। उन्होंने दावा किया कि गौड़ा को बिना वारंट के हिरासत में लिया गया जो संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। अदालत ने इस तर्क को गंभीरता से लिया और पुलिस से विस्तृत जवाब मांगा। मामले की अगली सुनवाई 12 सितंबर को होगी। तब तक अदालत ने गौड़ा की अंतरिम जमानत पर रोक लगा दी है। पुलिस को आदेश दिया गया है कि वह सभी संबंधित दस्तावेज और सीसीटीवी रिकॉर्ड अगली तारीख तक जमा करे। इस मामले ने कर्नाटक में पुलिस की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि बिना स्थानीय वारंट के किसी को दूसरे जिले से उठाना कानून के विपरीत है। उन्होंने मांग की कि पुलिस अपनी कार्रवाई की पारदर्शी रिपोर्ट सार्वजनिक करे। राज्य सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। विपक्षी दलों ने इस घटना को कानून के दुरुपयोग का उदाहरण बताया और मुख्यमंत्री से जांच के आदेश देने की अपील की। अदालत की टिप्पणी के बाद पुलिस विभाग ने आंतरिक समीक्षा शुरू कर दी है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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