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कोसी नदी: बिहार का शोक क्यों कहा जाता है?
28/8/2026, 7:01:00 am

बिहार के उत्तरी हिस्से में बहने वाली कोसी नदी को स्थानीय लोग ‘बिहार का शोक’ कहते हैं।
इस नाम की वजह नदी का अस्थिर व्यवहार है। हर मानसून में जलस्तर बढ़ता है और नदी अपना मार्ग बदल लेती है। इससे बड़े इलाके जलमग्न हो जाते हैं और लाखों लोग प्रभावित होते हैं।
कोसी का उद्गम तिब्बत के पठार से होता है और नेपाल के रास्ते भारत में प्रवेश करती है। नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में नदी कई बार अपनी धारा बदल चुकी है। 2008 की भीषण बाढ़ में कोसी ने अपना मार्ग लगभग 120 किलोमीटर पश्चिम की ओर मोड़ लिया था, जिससे सैकड़ों गांव डूब गए और लाखों परिवार बेघर हो गए।
नदी का जलग्रहण क्षेत्र लगभग 74,500 वर्ग किलोमीटर है। इसका पानी मुख्य रूप से ग्लेशियर पिघलने और मानसून की बारिश से आता है। नेपाल में बने छोटे-बड़े बांध और जल संरचनाएं प्रवाह को नियंत्रित करने की कोशिश करती हैं, लेकिन अत्यधिक बारिश के आगे वे नाकाफी साबित होती हैं।
भारत में कोसी बैराज और सैकड़ों किलोमीटर लंबी बांधों की श्रृंखला बाढ़ रोकने के लिए बनाई गई हैं। इन ढांचों को नियमित मरम्मत और मजबूती की जरूरत होती है।
बाढ़ का असर कृषि पर गहरा पड़ता है। धान, गेहूं और दलहन की फसलें जलमग्न हो जाती हैं, जिससे किसानों की आय घटती है। पेयजल आपूर्ति बाधित होती है और जलजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
सरकारी एजेंसियां समय-पूर्व चेतावनी प्रणाली और राहत शिविरों के जरिए नुकसान कम करने का प्रयास करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए नदी प्रबंधन, वनरोपण और सामुदायिक भागीदारी को मिलाकर काम करना होगा।
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
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