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मायावती ने बदले फैसले: भाई के बेटों को राजनीति से बाहर, भतीजी को लेकर नई रणनीति

14/9/2026, 10:00:43 am
मायावती ने बदले फैसले: भाई के बेटों को राजनीति से बाहर, भतीजी को लेकर नई रणनीति
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बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को पार्टी के किसी पद पर रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी की नीति अब परिवार के किसी भी सदस्य को बड़े पद पर नहीं रखने की है, ताकि संगठन में पारदर्शिता बनी रहे। हालांकि मायावती ने अपनी भतीजी के बारे में एक अलग संकेत दिया। उन्होंने कहा कि भतीजी को भविष्य में पार्टी की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, बशर्ते वह अपनी क्षमता साबित करे। इस घोषणा के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती अपने उत्तराधिकार की रणनीति को नए सिरे से तैयार कर रही हैं। पिछले कुछ सालों में उन्होंने कई बार अपने फैसले बदले हैं, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में असमंजस बना रहता है। उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में बसपा की स्थिति अभी भी कमजोर है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को केवल एक सीट मिली थी। ऐसे में मायावती का यह कदम पार्टी के अंदरूनी शक्ति संतुलन को साधने की कोशिश माना जा रहा है। आनंद कुमार लंबे समय से पार्टी के कोषाध्यक्ष और संगठनात्मक कामकाज देखते रहे हैं। उनके बेटों को बाहर रखने का फैसला परिवारवाद के आरोपों को कम करने के लिए लिया गया लगता है। वहीं, भतीजी को लेकर खुला विकल्प रखना मायावती की नई पीढ़ी को आगे लाने की मंशा दिखाता है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। कुछ ने इसे साहसिक कदम बताया, जबकि अन्य ने इसे केवल प्रतीकात्मक बताया। पिछले साल मायावती ने अपने बेटे आकाश आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया था, लेकिन कुछ महीने बाद ही उन्हें पद से हटा दिया गया। इस तरह के उलटफेर से कार्यकर्ताओं में अनिश्चितता बढ़ी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि मायावती अपने परिवार को राजनीति से दूर रखकर पार्टी की छवि सुधारना चाहती हैं, साथ ही नई पीढ़ी को तैयार कर रही हैं। उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार और मध्य प्रदेश में भी बसपा अपने आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। नए फैसले से इन राज्यों के कार्यकर्ताओं में भी उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि विपक्षी दलों ने इसे केवल आंतरिक मामला बताकर ज्यादा महत्व नहीं दिया। वे मानते हैं कि असली परीक्षा चुनावी मैदान में होगी। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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