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लाल क़िले से मोदी के ‘दिमाग़ी नक्सल’ बयान पर उठे सवाल

16/8/2026, 11:02:35 am
लाल क़िले से मोदी के ‘दिमाग़ी नक्सल’ बयान पर उठे सवाल
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल क़िले की प्राचीर से भाषण दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग ‘दिमाग़ी नक्सल’ की तरह सोचते हैं और देश की प्रगति को रोकना चाहते हैं। शब्द का चुनाव तुरंत चर्चा में आ गया। विपक्षी दलों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस ने पूछा कि प्रधानमंत्री किसे ‘दिमाग़ी नक्सल’ मानते हैं। उन्होंने कहा कि यह शब्द लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश है। समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने भी समान सवाल उठाए। इसी बीच एक व्यंग्यात्मक संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने बयान जारी किया। उसने लिखा कि ‘दिमाग़ी नक्सल’ की परिभाषा सरकार खुद तय करे, ताकि आम नागरिक को पता चले कि कौन इस श्रेणी में आता है। सरकार की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने केवल इतना कहा कि भाषण का मकसद राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करना था। मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि यह शब्द चुनावी साल में राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ा सकता है। कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि ‘नक्सल’ शब्द का ऐतिहासिक बोझ है, इसलिए इसका इस्तेमाल सावधानी से होना चाहिए। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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