लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
motihari

मोतिहारी के सदर अस्पताल में डिलीवरी के बाद जच्चा‑बच्चा की मौत, आशा कार्यकर्ता की सलाह पर हुआ था एडमिट

31/8/2026, 8:08:35 am
मोतिहारी के सदर अस्पताल में डिलीवरी के बाद जच्चा‑बच्चा की मौत, आशा कार्यकर्ता की सलाह पर हुआ था एडमिट
मोतिहारी, बिहार : जिले के सदर अस्पताल में बुधवार को एक प्रसूता और उसके नवजात शिशु की दर्दनाक मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर स्थानीय आशा कार्यकर्ता ने तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी थी। आशा कार्यकर्ता के निर्देश पर परिजन महिला को अस्पताल ले गए, जहां डिलीवरी के बाद दोनों की हालत अचानक बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलने पर अस्पताल प्रशासन ने तुरंत मेडिकल टीम को घटनास्थल पर भेजा। डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच में बताया कि प्रसव के दौरान रक्तस्राव और शिशु में सांस लेने में कठिनाई देखी गई, लेकिन दोनों की मौत के सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं। अस्पताल ने कहा कि सभी आवश्यक चिकित्सा प्रक्रियाएँ अपनाई गईं और घटना की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि घटना की गहन जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसमें स्त्रीरोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अधिकारी ने आश्वासन दिया कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। परिजनों और क्षेत्रीय निवासियों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया और मृतक परिवार को उचित मुआवजा तथा दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी और कर्मचारियों की लापरवाही ऐसी त्रासदी को बढ़ावा देती है। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रबंधन से तुरंत बेड की उपलब्धता, रक्त बैंक की पर्याप्त आपूर्ति और कर्मचारी प्रशिक्षण में सुधार की मांग की। बिहार राज्य में मातृ और शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रहती है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा जननी सुरक्षा योजना और आशा कार्यकर्ता नेटवर्क को मजबूत करने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर अभी भी अपर्याप्त साबित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर रेफरल, रक्त की उपलब्धता और आपातकालीन obstetric care तक पहुंच में सुधार से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
समाचार स्रोत: Google News — Motihari (Hindi)

संबंधित