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मिल्लतनगर की मुस्लिम महिलाएं: रोटी के साथ राखी भी बुनती हैं

27/8/2026, 3:05:53 pm
मिल्लतनगर की मुस्लिम महिलाएं: रोटी के साथ राखी भी बुनती हैं
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अहमदाबाद के मिल्लतनगर में सुबह की रोटी और दोपहर की राखी एक साथ बनती दिखती हैं। यहां कई घरों में मुस्लिम महिलाएं अपने रोज़मर्रा के काम के साथ राखी बनाने का हुनर भी दिखाती हैं। वे सुबह जल्दी उठकर आटा गूंथती हैं, रोटी सेंकती हैं और फिर दोपहर में रंग‑बिरंगे धागे, मोती और छोटे‑छोटे फूलों से राखी तैयार करती हैं। इस काम से उन्हें घर की आमदनी में मदद मिलती है और साथ ही त्योहार के मौके पर परिवार को खुशी भी देती हैं। स्थानीय बाज़ार में इन राखियों की मांग बढ़ रही है क्योंकि वे हाथ से बनी होती हैं और उनमें पारंपरिक डिज़ाइन होता है। कई महिलाएं बताती हैं कि उन्होंने यह कला अपनी माँ या दादी से सीखी है और अब वे इसे अगली पीढ़ी को सिखा रही हैं। सरकारी योजनाओं और गैर‑सरकारी संगठनों ने भी इन महिलाओं को प्रशिक्षण और कच्चा माल मुहैया कराया है। इससे उनकी आमदनी बढ़ी है और वे अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठा पा रही हैं। राखी बनाने का यह सिलसिला सामाजिक सौहार्द का भी प्रतीक है, क्योंकि अलग‑अलग समुदाय के लोग इन राखियों को खरीदते हैं। आने वाले त्योहारों में मिल्लतनगर की ये महिलाएं फिर से अपनी कला का जलवा दिखाएंगी और शहर को रंगीन राखियों से सजाएंगी। उनके घरों में छोटी‑छोटी कार्यशालाएं बनी हुई हैं जहां धागे, मोती और रंगीन कागज़ रखे रहते हैं। कुछ महिलाएं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी अपनी राखी बेचती हैं, जिससे उन्हें दूर‑दराज के ग्राहक मिलते हैं। पिछले साल एक स्थानीय NGO ने उन्हें डिज़ाइन वर्कशॉप में शामिल किया, जिससे नए पैटर्न सीखे गए। इस पहल ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और वे अब अपने उत्पाद की कीमत खुद तय करती हैं। समाज के अन्य वर्ग भी इन राखियों को सराहते हैं, जिससे सामाजिक एकता मजबूत होती है। आने वाले रक्षाबंधन पर मिल्लतनगर की गलियों में राखी की दुकानें सजेंगी और ग्राहकों की भीड़ लगेगी। इस तरह ये महिलाएं न केवल अपनी आजीविका चला रही हैं, बल्कि परंपरा को भी जीवित रख रही हैं। सरकार की मुद्रा योजना और स्थानीय बैंकों ने भी इन महिलाओं को कम ब्याज पर ऋण दिया, जिससे वे अपना कारोबार बढ़ा सकें। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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