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नोबेल विजेता नरगिस मोहम्मदी: जेल में 154 कोड़े, 44 साल की सजा, फिर भी लिख डाली किताब

19/9/2026, 2:03:38 am
नोबेल विजेता नरगिस मोहम्मदी: जेल में 154 कोड़े, 44 साल की सजा, फिर भी लिख डाली किताब
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ईरान की जेल में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी ने अपनी ज़िंदगी का सबसे कठिन दौर झेला है। उन्हें बालों से घसीटकर ले जाया गया, 154 कोड़े मारे गए और 44 साल की सजा सुनाई गई। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और जेल की कोठरी में ही एक किताब लिख डाली। नई किताब में उन्होंने अपने साथ हुए अत्याचार का ब्यौरा दिया है। किताब का नाम “व्हाइट टॉर्चर” है और इसमें जेल के अंदर की रोज़मर्रा की तकलीफें दर्ज हैं। नरगिस मोहम्मदी ईरान की जानी‑मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं और उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए लंबे समय तक आवाज़ उठाई है। 2023 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, लेकिन ईरान सरकार ने उन्हें जेल में ही रखा। नरगिस ने बताया कि उन्हें अंधेरे कमरे में रखा गया, खाना‑पीना कम दिया गया और बार‑बार शारीरिक यातना दी गई। उनकी किताब में जेल के अंदर चलने वाली गुप्त पूछताछ और मानसिक दबाव का भी वर्णन है। उन्होंने लिखा कि कोड़े मारने वाले उन्हें “आतंकवादी” कहते थे, जबकि वे केवल मानवाधिकार की आवाज़ उठा रही थीं। जेल प्रशासन ने उनकी किताब को जब्त करने की कोशिश की, लेकिन कुछ पन्ने बाहर निकल गए। पुस्तक के कुछ अंश सोशल मीडिया पर वायरल हुए और दुनिया भर के कार्यकर्ताओं ने उनका समर्थन किया। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस किताब को ईरान में मानवाधिकार उल्लंघन का सबूत माना है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने ईरान से नरगिस की रिहाई की मांग दोहराई है। भारत में भी कई मानवाधिकार संगठनों ने इस मामले पर बयान जारी किए हैं। नरगिस की बहन और वकील ने किताब के प्रकाशन के लिए विदेशी प्रकाशकों से संपर्क किया। अब किताब कई भाषाओं में छप चुकी है और विश्वभर में चर्चा में है। नरगिस की कहानी दिखाती है कि सत्ता के सामने सच बोलना कितना खतरनाक हो सकता है। फिर भी उन्होंने लिखना जारी रखा, क्योंकि वे मानती हैं कि शब्द ही सबसे बड़ी ताकत हैं। नरगिस ने जेल से ही नोबेल पुरस्कार ग्रहण किया था, पर वे अब भी सजा काट रही हैं। उनकी कहानी बताती है कि सच बोलने की कीमत कितनी बड़ी हो सकती है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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