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भारत

दिल्ली में लिखी गई शक्ति संतुलन की नई व्याकरण, पश्चिम अब तक नहीं पढ़ पाया

14/9/2026, 3:13:13 am
दिल्ली में लिखी गई शक्ति संतुलन की नई व्याकरण, पश्चिम अब तक नहीं पढ़ पाया
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दिल्ली में पिछले सप्ताह आयोजित एक उच्चस्तरीय रणनीतिक बैठक ने वैश्विक शक्ति संतुलन की नई परिभाषा तैयार की है। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। उन्होंने बारूद और धन के पुराने पैमानों को किनारे रखते हुए तकनीकी नवाचार, जलवायु सहयोग और डिजिटल अर्थव्यवस्था को शक्ति के नए स्तंभ घोषित किया। भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था में सामरिक साझेदारी, साझा सुरक्षा ढांचा और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार ही असली ताकत बनेंगे। भारत ने अफ्रीकी महाद्वीप, लैटिन अमेरिका और दक्षिण‑पूर्व एशिया के देशों के साथ संयुक्त अनुसंधान, स्वच्छ ऊर्जा और साइबर सुरक्षा पर काम करने का प्रस्ताव रखा। इस पहल का उद्देश्य एक ऐसा नेटवर्क बनाना है जो किसी एक बड़ी शक्ति के वर्चस्व पर निर्भर न रहे। पश्चिमी विश्लेषक और मीडिया अभी तक इस बदलाव को पूरी तरह पकड़ नहीं पाए हैं। वे अब भी सैन्य खर्च और जीडीपी आंकड़ों को ही शक्ति का मापदंड मानते हैं। कई थिंक‑टैंक की रिपोर्ट में दिल्ली की नई व्याकरण को ‘अस्पष्ट’ बताया गया है, जबकि भारतीय विशेषज्ञ इसे बहुध्रुवीय विश्व के लिए अनिवार्य मानते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई व्याकरण से भारत की वैश्विक भूमिका और मजबूत होगी। तकनीकी हस्तांतरण, जलवायु वित्त और डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं के क्षेत्र में भारत की पहल अन्य विकासशील देशों के लिए एक मॉडल बन सकती है। साथ ही, यह पहल चीन और अमेरिका के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा में एक स्वतंत्र धारा जोड़ेगी। आने वाले महीनों में ब्रिक्स, जी‑20 और संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर इस नई व्याकरण का असर दिखाई देगा। भारत अपने प्रस्तावों को ठोस कार्य योजनाओं में बदलने के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताओं को तेज करेगा। यदि यह प्रयास सफल रहता है, तो विश्व व्यवस्था में शक्ति का संतुलन वास्तव में बारूद और धन से आगे निकल सकेगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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