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नेपाल में तबाही: चीन की पनबिजली परियोजनाओं पर उठे सवाल

2/9/2026, 10:14:19 am
नेपाल में तबाही: चीन की पनबिजली परियोजनाओं पर उठे सवाल
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नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हालिया भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस क्षेत्र का तापमान विश्व औसत के मुकाबले लगभग दोगुनी गति से बढ़ रहा है, जिससे ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। ग्लेशियर पिघलने से नदियों में पानी का स्तर अचानक ऊपर जा रहा है और निचले गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में भारी बारिश और बर्फ पिघलने से स्थिति और बिगड़ सकती है। कई जलवायु विशेषज्ञ और भूवैज्ञानिक चीन की विशाल पनबिजली परियोजनाओं पर उंगली उठा रहे हैं। चीन ने तिब्बत और नेपाल की सीमा पर कई बड़े बांध बनाए हैं, जिनसे नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बदल गया है। इन बांधों से पानी का नियंत्रण तो होता है, लेकिन भूकंप या भारी भूस्खलन के समय बांध की दीवारें कमजोर पड़ सकती हैं। यदि कोई बांध टूटता है तो नीचे बसे लाखों लोगों को सीधा नुकसान होगा। नेपाल सरकार ने संयुक्त राष्ट्र और पड़ोसी देशों से तत्काल सहायता मांगी है। सेना, पुलिस और गैर-सरकारी संगठन मिलकर राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं, लेकिन दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण काम धीमा है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर वनरोपण, जल संचय और मिट्टी कटाव रोकने के उपाय अपनाए जाएं। साथ ही सभी बड़े बांधों की सुरक्षा जांच हर छह महीने में अनिवार्य की जाए। स्थानीय निवासी अब पूर्व चेतावनी प्रणाली और सुरक्षित आश्रय स्थलों की मांग कर रहे हैं। सरकार ने नई मौसम रडार लगाने और गांवों तक सूचना पहुंचाने के लिए मोबाइल अलर्ट सेवा शुरू की है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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