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नेपाल भूकंप: 97 साल की गुना माया मलबे में 60 घंटे बाद जिंदा निकलीं

31/8/2026, 7:25:22 am
नेपाल भूकंप: 97 साल की गुना माया मलबे में 60 घंटे बाद जिंदा निकलीं
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नेपाल के सिंधुपालचौक जिले में रविवार तड़के आए 6.2 तीव्रता के भूकंप ने पूरे इलाके को हिला दिया। सैकड़ों मकान ढह गए और मलबे में दबकर 120 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तबाही के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई जो हैरान करने वाली है। 97 साल की गुना माया अपने पोते के साथ एक मिट्टी-पत्थर के मकान में रहती थीं। भूकंप आने पर मकान भरभराकर गिर पड़ा। गुना माया मलबे के नीचे दब गईं। उनके पोते ने किसी तरह निकलकर जान बचाई, लेकिन दादी का पता नहीं चल सका। बचाव दल ने मलबा हटाना शुरू किया। पहले दिन कुछ नहीं मिला। दूसरे दिन भी निराशा हाथ लगी। तीसरे दिन सुबह जब बचावकर्मी एक कोने में खुदाई कर रहे थे, तो उन्हें धीमी-सी आवाज सुनाई दी। "कोई है क्या?" — आवाज आई। टीम ने तेजी से मलबा हटाया और गुना माया को जिंदा पाया। गुना माया होश में थीं। उन्होंने बताया कि वे एक छोटी-सी जगह में फंसी थीं जहां हवा आ रही थी। उन्होंने बारिश का पानी चाटकर प्यास बुझाई। खाने को कुछ नहीं था, बस इच्छाशक्ति थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद कहा कि उनकी हालत स्थिर है। डिहाइड्रेशन और मामूली चोटें हैं, लेकिन जान को खतरा नहीं। उन्हें काठमांडू के अस्पताल ले जाया गया है। स्थानीय लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने बचाव दल की तारीफ की और कहा कि हर संभव मदद पहुंचाई जा रही है। भूकंप का केंद्र रामचे था। सिंधुपालचौक के अलावा काव्रे, दोलखा और काठमांडू घाटी में भी नुकसान हुआ है। सेना, सशस्त्र पुलिस और स्वयंसेवक दिन-रात लगे हैं। अब तक 400 से ज्यादा घायल अस्पतालों में भर्ती हैं। नेपाल 2015 के विनाशकारी भूकंप का दंश अब तक झेल रहा है। उस वक्त लगभग 9,000 लोग मारे गए थे। तब से निर्माण मानक सख्त हुए, लेकिन गांवों में पुराने मकान अब भी खतरे में हैं। गुना माया की कहानी उन हजारों बुजुर्गों की याद दिलाती है जो आपदा में सबसे ज्यादा असहाय होते हैं। उनकी जीवटता उम्मीद जगाती है — पर तैयारी और मजबूत इमारतें ही असली सुरक्षा दे सकती हैं।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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