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नेपाल में बाढ़ के बाद बीमारी, भोजन संकट और पुनर्निर्माण की चुनौतियाँ

28/8/2026, 5:32:39 am
नेपाल में बाढ़ के बाद बीमारी, भोजन संकट और पुनर्निर्माण की चुनौतियाँ
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पिछले सप्ताह नेपाल के कई जिलों में भारी बारिश ने नदियों को उफान पर ला दिया। सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए और सरकारी आंकड़ों के अनुसार 150 से अधिक लोगों की मौत हुई जबकि हजारों बेघर हो गए। बाढ़ का पानी उतरने के बाद सबसे बड़ी चिंता स्वास्थ्य की है। गंदे पानी में मच्छर पनप रहे हैं जिससे मलेरिया और डेंगू का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय अस्पतालों में जरूरी दवाओं और टेस्ट किट की कमी देखी जा रही है। खाद्य सुरक्षा भी गंभीर संकट में है। खेतों में लगी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं और अनाज भंडार पानी में बह गए। राहत शिविरों तक राशन पहुंचाने में लॉजिस्टिक दिक्कतें आ रही हैं क्योंकि कई मुख्य सड़कें अब भी टूटी हुई हैं। बुनियादी ढांचे की मरम्मत एक बड़ा काम है। पुल, सड़कें, बिजली लाइनें और पेयजल आपूर्ति प्रणालियाँ क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। सरकार ने सेना और निजी ठेकेदारों को मिलाकर पुनर्निर्माण शुरू किया है, लेकिन फंड की कमी और भ्रष्टाचार की आशंका प्रक्रिया को धीमा कर सकती है। अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों ने तत्काल राहत सामग्री भेजी है। भारत, चीन और संयुक्त राष्ट्र ने चिकित्सा किट, टेंट, पानी की बोतलें और खाद्य पैकेट मुहैया कराए हैं। नेपाल सरकार ने एक राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति गठित की है जो रोज़ाना स्थिति की समीक्षा करेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाएँ बार‑बार होंगी। इसलिए दीर्घकालिक योजना में जल निकासी तंत्र, बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली और पुनर्वास नीतियों को मजबूत करना जरूरी है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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