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नेपाल में भारी बारिश से 40+ पुल-सड़कें ध्वस्त, भारत-चीन से तत्काल मदद की अपील

8/9/2026, 9:41:13 pm
नेपाल में भारी बारिश से 40+ पुल-सड़कें ध्वस्त, भारत-चीन से तत्काल मदद की अपील
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नेपाल में पिछले हफ्ते हुई भारी बारिश और लगातार भूस्खलन ने 40 से अधिक पुल और सड़कें पूरी तरह तबाह कर दी हैं। पहाड़ी ढलानों पर बने प्रमुख राजमार्ग और ग्रामीण संपर्क मार्ग दोनों ही बह गए हैं। इस तबाही ने काठमांडू घाटी के बाहर स्थित सैकड़ों गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से काट दिया है। लोग पैदल या खच्चर पर चलकर राहत सामग्री तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। नेपाल सरकार ने तुरंत राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल को सक्रिय किया और सेना की इंजीनियरिंग कोर को प्रभावित जिलों में तैनात कर दिया। हेलीकॉप्टर से राहत पैकेज और चिकित्सा दल दूरदराज के इलाकों में उतारे जा रहे हैं। प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल ने सार्वजनिक बयान में भारत और चीन से तत्काल सहायता की अपील की। उन्होंने कहा कि दोनों पड़ोसी देशों की तकनीकी क्षमता और लॉजिस्टिक नेटवर्क इस संकट में निर्णायक साबित हो सकते हैं। भारत ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए एनडीआरएफ की तीन टीमें, दो हेलीकॉप्टर और 50 टन राहत सामग्री नेपाल भेजने की घोषणा की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीमा पार समन्वय पहले से ही चल रहा है। चीन ने भी अपनी सीमा से सटे इलाकों में इंजीनियरिंग उपकरण, पोर्टेबल पुल किट और चिकित्सा शिविर स्थापित करने का वादा किया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वह नेपाल के साथ दीर्घकालिक पुनर्निर्माण पर भी चर्चा करेगा। स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को अस्थायी टेंट शिविरों में ठहराया है और पीने के पानी, खाना तथा दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। स्वयंसेवी संगठन भी राहत कार्यों में हाथ बँटा रहे हैं। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में और तेज बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे भूस्खलन का खतरा और बढ़ सकता है। बचाव दलों को पहाड़ी रास्तों पर आवाजाही में काफी दिक्कत हो रही है। नेपाल की अर्थव्यवस्था पहले से ही कोरोना महामारी के बाद धीमी गति से चल रही थी, अब इस आपदा से कृषि, पर्यटन और परिवहन क्षेत्र पर गहरा असर पड़ेगा। विदेशी सहायता के बिना पुनर्निर्माण कई साल तक खिंच सकता है। संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और कई गैर-सरकारी संगठनों ने भी तत्काल सहायता की पेशकश की है, लेकिन जमीनी हालात तेजी से बदल रहे हैं। समन्वय के अभाव में कुछ राहत सामग्री अभी तक गांवों तक नहीं पहुंच पाई है। सरकार ने नागरिकों से सतर्क रहने, अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर सार्वजनिक किए गए हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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