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नेपाल में शवों की पहचान बड़ी चुनौती, डीएनए जांच से होगा समाधान

31/8/2026, 8:28:17 pm
नेपाल में शवों की पहचान बड़ी चुनौती, डीएनए जांच से होगा समाधान
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काठमांडू। नेपाल में पिछले हफ्ते हुई भारी बारिश और भूस्खलन ने कई गांवों को तबाह कर दिया। मलबे में दबे शवों की हालत इतनी खराब है कि चेहरे या कपड़ों से पहचान करना लगभग असंभव हो गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पारंपरिक तरीके पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। शव कई दिनों तक दबे रहने के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। परिजन भी उन्हें पहचान नहीं पा रहे हैं। इस समस्या को देखते हुए सरकार ने डीएनए प्रोफाइलिंग का सहारा लेने का फैसला किया है। काठमांडू स्थित राष्ट्रीय फॉरेंसिक प्रयोगशाला को इस काम के लिए तैयार किया जा रहा है। प्रयोगशाला की क्षमता बढ़ाने के लिए नए उपकरण मंगाए गए हैं और विशेषज्ञों की टीम भी बुलाई गई है। प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए मोबाइल डीएनए संग्रह इकाइयां भी तैनात की जाएंगी। ये इकाइयां प्रभावित गांवों तक जाएंगी और परिजनों के नमूने लेंगी। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता के अनुसार अब तक दो सौ से अधिक शव बरामद हुए हैं, लेकिन केवल चालीस की पहचान हो पाई है। बाकी शवों को सुरक्षित रखने के लिए अस्थायी मुर्दाघर बनाए गए हैं। डीएनए मिलान में कई हफ्ते लग सकते हैं, फिर भी यह प्रक्रिया न्याय और परिजनों को राहत देने के लिए जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी मदद के लिए आगे आई हैं। रेड क्रॉस और इंटरपोल के फॉरेंसिक विशेषज्ञ नेपाली टीम को तकनीकी सहयोग दे रहे हैं। भारत ने भी आवश्यक उपकरण और किट भेजने की पेशकश की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहचान न होने से अंतिम संस्कार रुके हुए हैं। हिंदू परंपरा के अनुसार शव का दाह संस्कार अनिवार्य है। देरी से परिवार मानसिक तनाव में हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि प्रक्रिया तेज की जाएगी। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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