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नेतन्याहू का जबल अल-शेख़ दौरा: "यहां से नहीं हटेंगे सैनिक"

15/9/2026, 7:04:30 am
नेतन्याहू का जबल अल-शेख़ दौरा: "यहां से नहीं हटेंगे सैनिक"
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इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को जबल अल-शेख़ का अचानक दौरा किया। यह पहाड़ सीरिया और लेबनान की सीमा पर स्थित है और इसे माउंट हरमन के नाम से भी जाना जाता है। समुद्र तल से 2,800 मीटर ऊंची इस चोटी से दमिश्क और बेरूत दोनों नज़र आते हैं। नेतन्याहू ने सैनिकों से बात करते हुए साफ़ शब्दों में कहा, "हम यहां से नहीं हटेंगे। यह इसराइल की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है।" यह बयान सीरिया में बशर अल-असद की सरकार गिरने के कुछ दिन बाद आया है। असद के पतन के बाद इसराइल ने 1974 के युद्धविराम समझौते वाले बफ़र ज़ोन पर क़ब्ज़ा कर लिया था। नेतन्याहू ने इसे "अस्थायी क़दम" बताया था, लेकिन ताज़ा दौरे से लगता है कि इसराइल लंबे समय तक रुकने का इरादा रखता है। सामरिक नज़रिए से जबल अल-शेख़ बेहद अहम है। यहां से इसराइल सीरिया और लेबनान के बड़े इलाक़े पर नज़र रख सकता है। इसराइली सेना का कहना है कि ईरान समर्थित मिलिशिया और हिज़बुल्लाह इस इलाक़े का इस्तेमाल इसराइल पर हमले के लिए कर सकते हैं। सीरिया की नई अंतरिम सरकार ने इसराइली क़ब्ज़े की निंदा की है और संयुक्त राष्ट्र से दख़ल की मांग की है। लेबनान ने भी इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतरेस ने इसराइल से 1974 के समझौते का पालन करने को कहा है। इसराइल ने 1967 के युद्ध में गोलान हाइट्स पर क़ब्ज़ा किया था और 1981 में इसे मिला लिया था। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस विलय को मान्यता नहीं देता। जबल अल-शेख़ गोलान हाइट्स का ही हिस्सा है। ताज़ा क़दम से क्षेत्र में तनाव बढ़ने के आसार हैं। भारत इस घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए है। पश्चिम एशिया में स्थिरता भारत के ऊर्जा हितों और वहां रह रहे लाखों भारतीयों के लिए अहम है। भारत संयुक्त राष्ट्र में शांतिपूर्ण समाधान की वक़ालत करता रहा है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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