भारत
समुद्र के नीचे नई जंग: 15 लाख किमी केबल‑पाइपलाइन पर खतरा, ड्रोन करेंगे निगरानी
20/9/2026, 12:38:39 am

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समुद्र के नीचे बिछे केबल और पाइपलाइन दुनिया की इंटरनेट और ऊर्जा सप्लाई की रीढ़ हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक इनकी कुल लंबाई करीब 15 लाख किलोमीटर है और ये 100 से ज्यादा देशों को जोड़ते हैं।
हाल के वर्षों में कई घटनाओं ने इन नेटवर्क की कमजोरी उजागर की है – अचानक कटौती, संदिग्ध जहाजों की गतिविधि और प्राकृतिक आपदाएं।
इस खतरे को देखते हुए प्रमुख शक्तियाँ अब स्वायत्त ड्रोन तैनात कर रही हैं जो गहरे पानी में लगातार निगरानी कर सकते हैं।
ये ड्रोन सोनार, कैमरा और AI आधारित विश्लेषण से लैस हैं और किसी भी असामान्य गतिविधि को तुरंत रिपोर्ट करते हैं।
भारत भी अपनी समुद्री सीमा में केबल सुरक्षा के लिए ड्रोन प्रोग्राम शुरू कर रहा है, ताकि डिजिटल अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सप्लाई बाधित न हो।
अंतरराष्ट्रीय संगठन अब एक साझा प्रोटोकॉल बनाने पर काम कर रहे हैं जिससे किसी भी देश की कार्रवाई पारदर्शी रहे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीकी निगरानी के साथ कूटनीतिक सहयोग ही लंबे समय तक सुरक्षा दे सकता है।
निजी कंपनियाँ भी अपने नेटवर्क की रक्षा के लिए करोड़ों डॉलर खर्च कर रही हैं, क्योंकि एक घंटे की बंदी से अरबों का नुकसान हो सकता है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि ड्रोन तैनाती से समुद्री जीवन पर असर न्यूनतम रहे, इसके लिए सख्त दिशानिर्देश जरूरी हैं।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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