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बोलीविया के जंगलों में 100 साल बाद मिली नई जंगली बिल्ली 'टिल्कायो'
18/9/2026, 10:36:37 pm

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बोलीविया के घने युंगास जंगलों में वैज्ञानिकों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। यहां सौ साल बाद एक नई जंगली बिल्ली की प्रजाति खोजी गई है। इस नन्ही बिल्ली को स्थानीय भाषा में 'टिल्कायो' नाम दिया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज दक्षिण अमेरिका के पारिस्थितिकी तंत्र को समझने में अहम साबित होगी।
यह खोज बोलीविया के ला पाज़ विभाग के पहाड़ी वनों में हुई। वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने कैमरा ट्रैप और आनुवंशिक विश्लेषण के जरिए इस प्रजाति की पुष्टि की। टिल्कायो आकार में घरेलू बिल्ली से छोटी है। इसका वजन महज दो से तीन किलोग्राम है। इसके फर पर गहरे धब्बे और पूंछ पर काले छल्ले हैं। रात में सक्रिय रहने वाली यह बिल्ली छोटे चूहे, पक्षी और कीट-मकोड़े खाकर गुजारा करती है।
प्रमुख शोधकर्ता डॉ. मारिया गोमेज़ ने बताया कि इस क्षेत्र में आखिरी बार 1920 के दशक में कोई नई जंगली बिल्ली मिली थी। तब से इस इलाके को अच्छी तरह खंगाला जा चुका था। मगर युंगास के दुर्गम पहाड़ी जंगलों ने इस प्रजाति को अब तक छिपाए रखा। डीएनए जांच से पता चला कि टिल्कायो, लियोपर्डस जीनस की अन्य प्रजातियों से आनुवंशिक रूप से अलग है। इसे वैज्ञानिक नाम लियोपर्डस टिल्कायो दिया गया है।
बोलीविया के पर्यावरण मंत्रालय ने इस खोज को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया है। मंत्रालय का कहना है कि टिल्कायो के आवास को संरक्षित करने के लिए नए कदम उठाए जाएंगे। युंगास वन पहले से ही जैव विविधता के लिए जाने जाते हैं। यहां स्पेक्टैकल्ड भालू, जगुआर और कई दुर्लभ पक्षी भी पाए जाते हैं। नई बिल्ली की मौजूदगी इस बात का सबूत है कि ये जंगल अभी भी कई राज छिपाए हुए हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ चेताते हैं कि जलवायु परिवर्तन और अवैध कटाई से युंगास पर दबाव बढ़ रहा है। टिल्कायो जैसे छोटे मांसाहारियों पर इसका असर सबसे पहले पड़ता है। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि इस प्रजाति को आईयूसीएन की लाल सूची में शामिल कर तुरंत संरक्षण योजना बनाई जाए। फिलहाल टीम इस बिल्ली के व्यवहार, प्रजनन और क्षेत्रीय फैलाव का विस्तृत अध्ययन कर रही है।
यह खोज न सिर्फ विज्ञान बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए भी गर्व की बात है। आदिवासी समूह लंबे समय से इस बिल्ली के बारे में लोककथाएं सुनाते आए हैं। अब विज्ञान ने उनकी पारंपरिक जानकारी पर मुहर लगा दी है। आने वाले महीनों में और सर्वेक्षण होंगे ताकि टिल्कायो की वास्तविक आबादी और खतरों का सही आकलन हो सके।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
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