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टाटा संस की लिस्टिंग पर नोएल टाटा का विरोध, पांच बड़ी वजहें
19/9/2026, 4:01:37 am

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टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर घर में मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और शापूरजी पलोनजी ग्रुप लिस्टिंग के पक्ष में हैं, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा इसका विरोध कर रहे हैं।
नोएल टाटा का कहना है कि लिस्टिंग से कंपनी की स्वायत्तता पर असर पड़ेगा और ट्रस्ट के मूल उद्देश्य से भटकाव हो सकता है। उन्होंने यह भी दलील दी कि सार्वजनिक शेयरधारकों के दबाव में फैसले लेने की मजबूरी बढ़ जाएगी।
दूसरी ओर, चंद्रशेखरन का तर्क है कि लिस्टिंग से पूंजी जुटाना आसान होगा और कारोबार को वैश्विक स्तर पर ले जाने में मदद मिलेगी। शापूरजी पलोनजी ग्रुप भी मानता है कि बाजार में शेयर आने से पारदर्शिता बढ़ेगी।
जानकारों के मुताबिक विवाद की जड़ ट्रस्ट की संरचना में है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए किसी भी बड़े फैसले पर ट्रस्ट की मंजूरी जरूरी होती है। नोएल टाटा इस अधिकार का इस्तेमाल कर लिस्टिंग रोकना चाहते हैं।
फिलहाल मामला बोर्ड की बैठकों में अटका हुआ है। यदि सहमति नहीं बनी तो लिस्टिंग की योजना अनिश्चित काल के लिए टल सकती है। निवेशक और बाजार दोनों इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं।
टाटा संस देश के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में से एक है और इसकी सहायक कंपनियों में स्टील, ऑटो, आईटी और कंज्यूमर गुड्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में समूह ने कई अधिग्रहण किए हैं, जिससे पूंजी की जरूरत बढ़ी है।
नोएल टाटा ने पहले भी सार्वजनिक लिस्टिंग के विचार को खारिज किया था, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे ट्रस्ट की सामाजिक जिम्मेदारियों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का मुख्य काम शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास में योगदान देना है।
चंद्रशेखरन ने बोर्ड को बताया कि लिस्टिंग से न केवल पूंजी मिलेगी बल्कि शेयरधारकों के सामने जवाबदेही भी बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक निवेशकों के लिए टाटा ब्रांड की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
शापूरजी पलोनजी ग्रुप के प्रवक्ता ने बताया कि उनके पास टाटा संस में 18 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है और वे लिस्टिंग को समूह के दीर्घकालिक हित में देखते हैं। उन्होंने नियामक मंजूरी की प्रक्रिया तेज करने की मांग की।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि लिस्टिंग होती है तो टाटा संस का मूल्यांकन 12-15 लाख करोड़ रुपये के दायरे में आ सकता है। हालांकि, ट्रस्ट के विरोध के चलते समयसीमा अनिश्चित बनी हुई है।
सरकार और सेबी भी इस मामले पर नजर रख रहे हैं, क्योंकि किसी बड़े समूह की लिस्टिंग से बाजार में तरलता और निवेशक भरोसा प्रभावित होता है। अंतिम फैसला बोर्ड की अगली बैठक में लिया जा सकता है।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
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