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दस साल बाद NSE का IPO लॉन्च, BSE को चुनौती

19/9/2026, 1:57:23 am
दस साल बाद NSE का IPO लॉन्च, BSE को चुनौती
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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने दस साल के लंबे इंतजार के बाद अपना इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) लॉन्च किया है। एक्सचेंज अब खुद को शेयर बाजार में लिस्ट कराकर सार्वजनिक कंपनी बनेगा। इस कदम से NSE को पूंजी जुटाने, पारदर्शिता बढ़ाने और कॉरपोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने का मौका मिलेगा। आईपीओ की घोषणा के तुरंत बाद बीएसई के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार के जानकारों का मानना है कि NSE के लिस्ट होने से दोनों एक्सचेंज के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होगी, जिससे BSE की बाजार हिस्सेदारी और कमाई पर दबाव पड़ सकता है। निवेशक अब दोनों प्लेटफॉर्म की तुलना करके फैसला लेंगे। देरी की मुख्य वजहें नियामक मंजूरी, कॉरपोरेट गवर्नेंस के मसले और अदालती मामले रहे। SEBI ने कई बार नियमों में बदलाव किए, जिससे NSE को अपने दस्तावेज़ बार‑बार तैयार करने पड़े। साथ ही, पुराने शेयरधारकों के विवाद और ऑडिट रिपोर्ट की जांच ने प्रक्रिया को और धीमा कर दिया। अब NSE का IPO करीब 10,000 करोड़ रुपये का होगा। कंपनी अपने शेयरों को खुद के प्लेटफॉर्म पर ही ट्रेड करेगी, जिससे लेन‑देन की लागत कम रहेगी। इससे छोटे और खुदरा निवेशकों को भी हिस्सेदारी लेने का आसान रास्ता मिलेगा। लिस्टिंग के बाद NSE को तिमाही नतीजे सार्वजनिक करने होंगे, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। BSE पहले से लिस्टेड है और उसका मुनाफा मुख्य रूप से ट्रेडिंग फीस, क्लियरिंग और सेटलमेंट चार्ज से आता है। NSE लिस्ट होने के बाद अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिटिक्स और इंडेक्स लाइसेंसिंग जैसे नए कारोबारी क्षेत्रों से कमाएगा। दोनों एक्सचेंज अब शेयरधारकों के प्रति जवाबदेह होंगे, जिससे प्रबंधन पर निगरानी मजबूत होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि दो बड़े एक्सचेंज के लिस्ट होने से भारतीय इक्विटी बाजार में प्रतिस्पर्धा और नवाचार तेज होंगे। निवेशकों को बेहतर कीमत, नए प्रोडक्ट और अधिक विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, नियामक SEBI को दोनों एक्सचेंज के बीच हितों के टकराव रोकने के लिए कड़े नियम लागू करने होंगे। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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