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पहाड़ों की बारिश ने बढ़ाया पश्चिम चंपारण में बाढ़ का खतरा

29/8/2026, 1:35:00 am
पहाड़ों की बारिश ने बढ़ाया पश्चिम चंपारण में बाढ़ का खतरा
नेपाल के पहाड़ी जिलों में पिछले तीन दिन से लगातार बारिश हो रही है। बादल फटने से गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी और छोटी नदियाँ उफान पर आ गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार इन इलाकों में 150 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। पानी तेज़ी से नीचे की ओर बह रहा है और बिहार के पश्चिम चंपारण जिले की सीमा पर पहुँच चुका है। निचले इलाकों के खेत, सड़कें और कई गाँव पानी में डूबने लगे हैं। ग्रामीणों ने अपने मवेशियों और ज़रूरी सामान को ऊँचे स्थानों पर पहुँचा दिया है। जिला प्रशासन ने बाढ़ अलर्ट जारी किया है और राहत दलों को तैयार रखा है। एनडीआरएफ की दो टीमें नावों और लाइफ जैकेट के साथ नदियों के किनारे तैनात हैं। बाढ़ नियंत्रण कक्ष से जलस्तर की हर घंटे निगरानी की जा रही है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में और बारिश की संभावना जताई है। इससे नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और निचले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है। स्थानीय विधायक और पंचायत प्रतिनिधि गांवों में जाकर स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं। राशन, दवा और पीने का पानी पहुंचाने का इंतज़ाम किया जा रहा है। ग्रामीण भी एक दूसरे की मदद कर रहे हैं और सामुदायिक रसोई चला रहे हैं। पहले भी इस इलाके में नेपाल की बारिश से बाढ़ आई है। इस बार जल्दी चेतावनी मिलने से नुकसान कम होने की उम्मीद है। प्रशासन और जनता मिलकर हालात पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि नदियों के जलस्तर पर लगातार नज़र रखी जाएगी और ज़रूरत पड़ने पर अतिरिक्त राहत बल तैनात किए जाएंगे। जनता से अपील है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें। गंडक नदी के बगहा गेज पर जलस्तर 6.2 मीटर तक पहुँच चुका है, जो खतरे के निशान से केवल 0.3 मीटर नीचे है। पिछले साल इसी गेज पर 6.5 मीटर दर्ज हुआ था और तब बड़े पैमाने पर फसल बर्बाद हुई थी। स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट भेजी हैं। डायरिया, त्वचा रोग और साँस की बीमारियों के मामले बढ़ने की आशंका है। टीमें पानी की गुणवत्ता की जाँच कर रही हैं और क्लोरीन टैबलेट बाँट रही हैं। नेपाल के जल संसाधन मंत्रालय ने भारतीय अधिकारियों के साथ डेटा साझा करने की सहमति दी है। दोनों देशों की टीमें नदी के बहाव पर नज़र रखने के लिए संयुक्त निगरानी केंद्र स्थापित कर रही हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करें और बीज भंडारण को सुरक्षित रखें। कृषि विभाग ने फसल बीमा योजना के तहत त्वरित दावा प्रक्रिया शुरू की है। स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट जारी किए जा रहे हैं। लोग व्हाट्सऐप ग्रुप के ज़रिए एक दूसरे को सुरक्षित स्थानों की जानकारी दे रहे हैं। समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)

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