लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

पाकिस्तान अलग‑थलग, भारत बना शांति संवाद का नया केंद्र

13/9/2026, 2:59:32 am
पाकिस्तान अलग‑थलग, भारत बना शांति संवाद का नया केंद्र
Original publisher image
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इस साल के सत्र में पाकिस्तान की कोई उपस्थिति नहीं देखी गई, जबकि 나머지 सदस्य देशों ने एकमत से आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकल्प लिया। इस घोषणा ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग‑थलग कर दिया। भारत ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए शांति और विकास के लिए एक नया संवाद मंच प्रस्तुत किया, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में रखा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि विवादों का समाधान केवल बातचीत से संभव है और उन्होंने ब्रिक्स भागीदारों से आग्रह किया कि वे आर्थिक सहयोग के साथ‑साथ क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी संयुक्त रूप से काम करें। उनके इस आह्वान को चीन, रूस, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका ने सराहा और इस पहल का समर्थन किया। मोदी ने आगे बताया कि इस केंद्र के पहले वर्ष में पांच विषय‑आधारित कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें सीमा प्रबंधन, जल साझाकरण, आतंकवाद रोकथाम, व्यापार सुविधा और जलवायु प्रतिरोधकता शामिल हैं। पाकिस्तान की ओर से कोई प्रतिनिधि नहीं आया न ही कोई लिखित बयान जारी किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अलगाव उसकी विदेश नीति में स्पष्ट gaps को उजागर करता है, जबकि भारत की छवि एक जिम्मेदार वैश्विक अभिनेता के रूप में मजबूत हुई है। इस विकास से उसके द्वारा शांति पहल की अगुआई करने की अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा में वृद्धि हुई है और कई neutrale देशों ने इस मंच में भागीदारी की इच्छा जताई है। सम्मेलन के अंत में जारी संयुक्त घोषणापत्र में "शांति संवाद केंद्र" की स्थापना का प्रस्ताव किया गया। इस केंद्र का उद्देश्य सीमा विवाद, जल बंटवारा और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर नियमित वार्ता को सुविधाजनक बनाना है। इसकी कार्यप्रणाली में मासिक बैठकें, विशेषज्ञ पैनल, शांति‑निर्माण कार्यशालाएं और एक ऑनलाइन ज्ञान‑पortal शामिल होंगे, जिससे सदस्य देशों को डेटा और सर्वोत्तम प्रथाओं का त्वरित आदान‑प्रदान मिल सके। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि "यह केंद्र दक्षिण एशिया में स्थायी शांति लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है"। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान भी इस मंच से जुड़कर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत बनाएगा, और इसी के साथ केंद्र की financi­ng को ब्रिक्स देशों और संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थन प्राप्त होगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित