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जनरल द्विवेदी की 'भूगोल-इतिहास' चेतावनी पर पाकिस्तान का परमाणु राग: क्या है माजरा?

17/5/2026, 10:05:45 am
जनरल द्विवेदी की 'भूगोल-इतिहास' चेतावनी पर पाकिस्तान का परमाणु राग: क्या है माजरा?
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भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के एक बयान ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में हलचल मचा दी है। शनिवार को दिए गए इस बयान में जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया था कि अगर पाकिस्तान ने कभी भारत पर युद्ध थोपने की कोशिश की, तो उसका अंजाम 'भूगोल और इतिहास' दोनों से मिटा दिया जाएगा। इस तीखे बयान पर पाकिस्तान ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए अपनी परमाणु क्षमता का हवाला दिया है, जिसने दोनों देशों के बीच तनाव को फिर से बढ़ा दिया है। जनरल द्विवेदी की यह टिप्पणी संभवतः पाकिस्तान की उन स्थायी कार्रवाइयों और बयानों के जवाब में आई थी, जो वे लगातार भारत के खिलाफ करते रहे हैं। भारतीय सेना प्रमुख का यह कहना कि पाकिस्तान को 'भूगोल और इतिहास' से मिटा दिया जाएगा, यह एक मजबूत कूटनीतिक संदेश था। इसका अर्थ यह लगाया जा रहा है कि भारत अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है और ऐसे किसी भी कृत्य के गंभीर परिणाम होंगे जिनका हिसाब देना मुश्किल होगा। इसके जवाब में, पाकिस्तानी सेना ने न सिर्फ स्वयं को 'परमाणु शक्ति' घोषित किया, बल्कि यह भी कहा कि वे अपने पड़ोसियों की आक्रामकता का सामना करने में सक्षम हैं। पाकिस्तान की इस प्रतिक्रिया को अक्सर उसकी विदेश नीति का एक हिस्सा माना जाता है, जहाँ वह अपनी क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए अपनी परमाणु क्षमता पर जोर देता है। हालांकि, इस तरह की बयानबाजी से दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि जनरल द्विवेदी का बयान सीधे तौर पर युद्ध की धमकी नहीं था, बल्कि यह एक चेतावनी थी कि भारत अपने दुश्मन को बर्दाश्त नहीं करेगा। 'भूगोल और इतिहास' से मिटा देने का मतलब शायद यह भी हो सकता है कि भारत की क्षमता इतनी अधिक है कि वह किसी भी ऐसे राष्ट्र को अपनी मानचित्र से हमेशा के लिए गायब कर सकता है जो उसे चुनौती देगा। वहीं, पाकिस्तान का परमाणु हथियार का जिक्र करना उसकी पुरानी रणनीति है। वह अक्सर अपनी सुरक्षा चिंताओं और भारतीय सैन्य क्षमता के जवाब में परमाणु शक्ति होने का दावा करता है। यह बयानबाजी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि दक्षिण एशिया में किसी भी तरह का सैन्य टकराव गंभीर वैश्विक परिणाम ला सकता है। फिलहाल, दोनों देशों के बीच यह जुबानी जंग जारी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में इस मुद्दे पर कैसी कार्रवाई होती है और क्या दोनों देश बातचीत के माध्यम से तनाव कम करने का रास्ता अपनाते हैं या फिर यह बयानबाजी और अधिक टकराव को जन्म देती है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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