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पाकिस्तान: आसिम मुनीर बने पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस, तीनों सेनाओं की कमान मिली

5/9/2026, 11:26:02 pm
पाकिस्तान: आसिम मुनीर बने पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस, तीनों सेनाओं की कमान मिली
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पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को अब तीनों सेनाओं की कमान सौंप दी गई है। सरकार ने उन्हें देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस नियुक्त किया है, जिससे वे थल सेना, वायु सेना और नौसेना के ऑपरेशनल फैसले सीधे ले सकेंगे। पहले यह जिम्मेदारी अलग-अलग प्रमुखों के पास थी, जिसके कारण तालमेल में देरी होती थी और संयुक्त अभियानों की योजना बनाना मुश्किल होता था। नई व्यवस्था से सैन्य कार्रवाई की गति बढ़ने की उम्मीद है और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। आसिम मुनीर ने 2022 में सेना प्रमुख का पद संभाला था और तब से वे आंतरिक सुरक्षा, सीमा विवाद और आतंकवाद विरोधी अभियानों पर खास ध्यान दे रहे हैं। मुनीर इससे पहले इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के प्रमुख रह चुके हैं और उन्हें खुफिया तंत्र के साथ सैन्य ऑपरेशन को जोड़ने का लंबा अनुभव है। उनकी छवि एक सख्त और परिणामोन्मुख कमांडर की है, जिसने सीमा पर कई तनावपूर्ण स्थितियों को संभाला है। नए पद के लिए संसद ने एक विशेष विधेयक पारित किया, जिसमें चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस की शक्तियां, कार्यकाल और जवाबदेही तय की गई हैं। इस कानून के तहत मुनीर को तीन वर्ष का कार्यकाल मिलेगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है। उनके नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना ने कई बड़े अभ्यास आयोजित किए, आधुनिक हथियार प्रणालियों की खरीद तेज की और साइबर युद्ध क्षमता को मजबूत किया। विश्लेषकों का मानना है कि चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस का पद सेना के राजनीतिक प्रभाव को और मजबूत करेगा, क्योंकि अब एक ही अधिकारी तीनों अंगों का प्रतिनिधित्व करेगा। विपक्षी दलों ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं और संसद में बहस की मांग की है, ताकि नागरिक नियंत्रण और पारदर्शिता बनी रहे। सरकार का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है और इससे संकट के समय तेजी से निर्णय लेना संभव होगा। नए चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस के पास रणनीतिक योजना, संसाधन आवंटन और तीनों सेनाओं के संयुक्त प्रशिक्षण का पूरा अधिकार होगा। आने वाले महीनों में उनकी प्राथमिकताओं में सीमा सुरक्षा, कश्मीर मुद्दे पर रणनीतिक तैयारी और आतंकवाद विरोधी अभियानों का विस्तार शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इस बदलाव को पाकिस्तान की सैन्य ढांचे में एक बड़े सुधार के रूप में देख रहे हैं, लेकिन वे नागरिक सर्वोच्चता पर नजर रखने की सलाह भी देते हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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