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पलामू पुलिस ने नक्सली नेताओं के पोस्टर चिपकाकर ग्रामीणों से संवाद शुरू किया

8/9/2026, 2:58:32 pm
पलामू पुलिस ने नक्सली नेताओं के पोस्टर चिपकाकर ग्रामीणों से संवाद शुरू किया
पलामू पुलिस ने झारखंड और बिहार के सीमावर्ती क्षेत्र में एक अनोखी पहल शुरू की है। उन्होंने उन टॉप नक्सलियों के बड़े‑बड़े फोटो वाले पोस्टर छपवाए हैं, जिन पर राज्य政府 ने इनाम घोषित किया है। ये पोस्टर गांवों के मुख्य चौराहों, स्कूलों और पंचायत भवनों पर लगाए गए हैं ताकि अधिक से अधिक लोग उन्हें देख सकें। अभियान का मुख्य उद्देश्य दोहरा है। पहला, समुदाय को यह दिखाना कि पुलिस नक्सली नेताओं की पहचान कर रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए aktif रूप से प्रयास कर रही है। दूसरा, स्थानीय निवासियों से संवाद करके उनके मन में बैठे किसी भी भय या गलतफ़हमी को दूर करना और भरोसा कायम करना है। पोस्टर लगाने के बाद पुलिस टीमें गावों में जाकर बैठकें करती हैं। इन बैठकों में ग्रामीणों से उनके रोज़मर्रा के मुद्दों – जैसे कच्ची सड़कें, बिजली की अनियमित आपूर्ति, पेयजल की कमी और रोजगार के अवसरों – के बारे में पूछताछ की जाती है। पुलिस अधिकारी इन समस्याओं को लिखकर जिला प्रशासन को भेजते हैं। कई बुज़ुरगों ने बताया कि पहले वे पुलिस को देखकर डरते थे, लेकिन अब जब उन्होंने पोस्टर पर नक्सलियों के चेहरे देखे और पुलिस से सीधे बात की, तो उनकी धारणा बदल गई है। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस वास्तव में उनकी मदद करना चाहती है तो वे किसी भी तरह की जानकारी देने को तैयार हैं। युवा वर्ग ने अपनी बात रखते हुए कहा कि बेरोजगारी और भूमि विवाद की वजह से कुछ दोस्त गलत रास्ते पर चल पड़े हैं। पुलिस ने उन्हें बताया कि राज्य द्वारा चलाए जा रहे कौशल विकास केंद्रों में मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है और प्लेसमेंट की भी व्यवस्था है। कुछ युवाओं ने तुरंत फॉर्म भरने की इच्छा जताई। बैठक के अंत में पुलिस टीम ने एक फ़ीड백 फॉर्म बाँटा जिसमें लोग अज्ञात रूप से किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी दे सकते हैं। पहले दिन तक पचास से अधिक फॉर्म जमा हो चुके हैं और उनमें से दस में具体적인 सूचना मिली है, जिसकी जाँच जारी है। पुलिस अधीक्षक ने prensa को बताया कि इस प्रकार के सामुदायिक policing मॉडल को अगले तीन महीनों में राज्य के पांच और जिलों में pilot के रूप में लागू करने की योजना है। उनका मानना है कि जब सुरक्षा एजेंसियां विकास के साथ हाथ मिलाती हैं, तो नक्सली विचारधारा का आधार कमजोर होता है। आगे की योजना में शामिल है कि हर महीने एक बार ऐसे पोस्टर अभियान दोहराया जाए और साथ में स्थानीय संस्कृति कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ ताकि युवाओं को सकारात्मक ऊर्जा देने का मौका मिले। अब तक की प्रतिक्रिया सकारात्मक है और पुलिस उम्मीद कर रही है कि इससे जमीन पर वास्तविक बदलाव आएगा।
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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