लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
champaran

पश्चिम चंपारण के शिक्षक डिजिटल क्लास से बदल रहे बच्चों का भविष्य

5/9/2026, 1:00:00 am
पश्चिम चंपारण के शिक्षक डिजिटल क्लास से बदल रहे बच्चों का भविष्य
पश्चिम चंपारण के सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में शिक्षक अब काली बोर्ड की जगह स्मार्ट बोर्ड, प्रोजेक्टर और टैबलेट का नियमित इस्तेमाल कर रहे हैं। यह परिवर्तन जिला प्रशासन की ‘डिजिटल शिक्षा अभियान’ के तहत पिछले वर्ष शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण बच्चों को शहरी स्तर की पढ़ाई देना है। शिक्षकों को तीन चरणों में ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें वीडियो लेसन बनाना, इंटरैक्टिव क्विज तैयार करना और वर्चुअल लैब संचालित करना शामिल था। प्रशिक्षण के बाद हर कक्षा में एक स्मार्ट बोर्ड लगाया गया और छात्रों को टैबलेट वितरित किए गए, ताकि वे घर पर भी पाठ्य सामग्री दोहरा सकें। ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी कम होने के बावजूद, स्कूलों ने ऑफलाइन मोड में भी सामग्री डाउनलोड करने की सुविधा दी है। जिला शिक्षा अधिकारी रंजन कुमार ने बताया कि डिजिटल क्लास शुरू होने के बाद छात्रों की उपस्थिति में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। परीक्षा परिणामों में भी सुधार देखा गया; पिछले सत्र की तुलना में इस वर्ष कक्षा 5 और 8 के औसत अंक 8 प्रतिशत बढ़े हैं। अभिभावक भी इस बदलाव से खुश हैं; कई माता-पिता ने बताया कि बच्चे अब मोबाइल पर वीडियो देखकर होमवर्क पूरा करते हैं। कुछ स्कूलों में सौर ऊर्जा से चलने वाले प्रोजेक्टर लगाए गए हैं, जिससे बिजली कटौती के दौरान भी कक्षाएं बाधित नहीं होतीं। शिक्षक संघ के अध्यक्ष मनोज सिंह ने इस पहल का स्वागत किया और सरकार से और अधिक डिवाइस तथा उच्च गति इंटरनेट की मांग की। जिला प्रशासन ने अगले दो वर्षों में सभी प्राथमिक स्कूलों को पूरी तरह डिजिटल बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए बजट में 12 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यम से ग्रामीण बच्चों की सोचने की क्षमता और रचनात्मकता में तेजी से वृद्धि होगी। स्थानीय ग्राम पंचायतों ने स्कूलों को वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित करने में सहयोग दिया, जिससे दूरदराज के गांवों तक इंटरनेट पहुंच सका। एक शिक्षक, राजेश कुमार, ने कहा कि स्मार्ट बोर्ड पर चित्र और एनिमेशन दिखाने से बच्चे कठिन विज्ञान विषय भी आसानी से समझ लेते हैं। छात्रा अंजली ने बताया कि टैबलेट पर गणित के खेल खेलने से उसकी गणना तेज हुई और परीक्षा में आत्मविश्वास बढ़ा। हालांकि, कुछ शिक्षकों ने पुराने पाठ्यक्रम को डिजिटल फॉर्मेट में बदलने में समय लगने की शिकायत की है। जिला प्रशासन ने इस समस्या के समाधान के लिए सामग्री निर्माण टीम गठित की है, जो हर महीने नए डिजिटल लेसन तैयार करेगी। इस पहल से पश्चिम चंपारण देश के अन्य पिछड़े जिलों के लिए एक मॉडल बन सकता है, जहां तकनीक और शिक्षा का मेल ग्रामीण भविष्य को रोशन करेगा। समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)

संबंधित