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लिंग के आकार बढ़ाने के लिए फिलर्स का चलन तेज़

16/8/2026, 2:35:23 pm
लिंग के आकार बढ़ाने के लिए फिलर्स का चलन तेज़
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लिंग के आकार को बढ़ाने के लिए अब कई मर्द फिलर्स का सहारा ले रहे हैं। यह ट्रेंड पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है।\n\nफिलर्स असल में एक तरह का इंजेक्शन होता है जिसे स्किन के नीचे डाला जाता है। इससे लिंग मोटा और लंबा दिखने लगता है।\n\nइसके दो मुख्य तरीके हैं। पहला, सर्जरी के जरिए इम्प्लांट लगाना। दूसरा, नॉन‑सर्जिकल तरीके से हायल्यूरोनिक एसिड या सिलिकॉन जेल इंजेक्ट करना।\n\nडॉक्टर कहते हैं कि नॉन‑सर्जिकल तरीका कम जोखिम वाला है, लेकिन इसका असर कुछ महीनों तक ही रहता है। सर्जरी से स्थायी नतीजे मिलते हैं, पर इन्फेक्शन और स्कारिंग का खतरा ज्यादा होता है।\n\nहाल के सर्वे में पता चला कि 30‑40 साल के पुरुषों में फिलर्स की मांग 25 % बढ़ी है। सोशल मीडिया पर ‘बॉडी पॉजिटिव’ कैंपेन और पोर्न इंडस्ट्री के असर को भी वजह माना जा रहा है।\n\nएक्सपर्ट सलाह देते हैं कि किसी भी प्रोसीजर से पहले क्वालिफाइड यूरोलॉजिस्ट से बात करें। अपनी मेडिकल हिस्ट्री बताएं और संभावित साइड‑इफेक्ट्स समझें।\n\nअगर आप फिलर्स लेना चाहते हैं तो केवल सरकारी या मान्यता प्राप्त क्लिनिक में जाएं। सस्ते ऑफर के चक्कर में अनट्रेंड प्रैक्टिशनर के पास न जाएं।\n\nअंत में, अपने शरीर को लेकर आत्मविश्वास रखना ज्यादा जरूरी है। किसी भी कॉस्मेटिक बदलाव से पहले अपने डॉक्टर से खुलकर बात करें।\n\nकई क्लिनिक अब पैकेज डील दे रहे हैं जिसमें कंसल्टेशन, इंजेक्शन और फॉलो‑अप शामिल होते हैं। एक सेशन की कीमत आमतौर पर 30 हज़ार से 80 हज़ार रुपये के बीच होती है।\n\nमरीजों की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले हफ्ते में सूजन और हल्का दर्द आम बात है। ज्यादातर लोग दो हफ्ते बाद सामान्य कामकाज पर लौट आते हैं।\n\nहालांकि, कुछ केस में इन्फेक्शन, गांठ बनना या असमान शेप की शिकायत आई है। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।\n\nमनोवैज्ञानिक पहलू भी अहम है। कई पुरुष अपने आकार को लेकर चिंतित रहते हैं, जिससे आत्मसम्मान प्रभावित होता है। काउंसलिंग के साथ फिलर्स लेने से नतीजे बेहतर मिलते हैं।\n\nसरकार ने हाल ही में कॉस्मेटिक इंजेक्शन के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं। केवल रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर ही यह प्रक्रिया कर सकते हैं।\n\nअगर आप सोच रहे हैं कि फिलर्स स्थायी समाधान हैं, तो यह गलत है। नॉन‑सर्जिकल फिलर्स 6‑12 महीने तक असर रखते हैं, फिर री‑इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है।\n\nसमाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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