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पूर्वी चंपारण के शिक्षक प्रशांत ने इलेक्ट्रिक बाइक से कटी पेट्रोल की चिंता, हर महीने बच रहे ₹500

14/9/2026, 4:37:16 am
पूर्वी चंपारण के शिक्षक प्रशांत ने इलेक्ट्रिक बाइक से कटी पेट्रोल की चिंता, हर महीने बच रहे ₹500
पूर्वी चंपारण के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने वाले प्रशांत कुमार को पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने रोज़मर्रा के खर्च को बोझिल बना दिया था। उनके घर से स्कूल तक की दूरी करीब तीस किलोमीटर है, जिसे पहले वे अपनी पेट्रोल चलित बाइक से तय किया करते थे। हर लीटर पेट्रोल की कीमत जब एक सौ dieci के पार चली गई, तो मासिक ईंधन खर्च दो हज़ार पाँच सौ रुपये तक पहुंच गया। इससे उनके बजट पर असर पड़ने लगा और उन्होंने विकल्प खोजने की सोची। पिछले वर्ष त्योहारी季 के बाद प्रशांत ने बाज़ार में उपलब्ध इलेक्ट्रिक बाइक के मॉडल देखना शुरू किया। उन्होंने एक 2.5 किलोवाट की बैटरी वाली बाइक चुनी, जो एक बार peł चार्ज पर अस्सी किलोमीटर तक चलती है। बाइक की कीमत लगभग एक लाख बीस हज़ार रुपये थी, लेकिन राज्य सरकार की सब्सिडी और स्थानीय बैंक के कम ब्याज वाले लोन की मदद से उन्होंने इसे आसानी से खरीद लिया। घर पर मौजूद पंद्रह एम्पियर का सामान्य सॉकेट ही चार्जिंग के लिए पर्याप्त साबित हुआ। अब प्रशांत हर सुबह‑शाम स्कूल आते‑जाते हैं और बाइक की बैटरी को रात में एक बार प्लग‑इन करके तैयार रखते हैं। इससे उनके मासिक बिजली बिल में केवल दो हज़ार रुपये की वृद्धि होती है, जबकि पहले पेट्रोल पर दो हज़ार पाँच सौ रुपये खर्च होते थे। इस प्रकार उन्हें हर महीने लगभग पाँच सौ रुपये की सीधी बचत हो रही है, जो उनके पारिवारिक बजट में noticeable अंतर ला रही है। प्रशांत कहते हैं, “पहले मैं हर सुबह पेट्रोल पम्प की लाइन में लगकर समय और पैसा दोनों गंवा देता था। अब बस बाइक को चार्ज करने की आदत डाल ली है, और मन में शांति भी है।” वे पर्यावरण के प्रति भी जागरूक हैं और बताते हैं कि इलेक्ट्रिक बाइक से ध्वनि प्रदूषण और उत्सर्जन दोनों में कमी आई है। मेंटेनेंस का खर्च भी पेट्रोल बाइक की तुलना में लगभग आधा रह गया है, क्योंकि तेल बदलने और स्पार्क प्लग जैसी नियमित प्रक्रियाओं की आवश्यकता नहीं है। इलाके के अन्य शिक्षक और ग्रामीण प्रशांत के अनुभव से प्रेरित हो रहे हैं। स्थानीय डीलर राजेश कुमार का कहना है कि पिछले छह महीनों में इलेक्ट्रिक बाइक की बिक्री चालीस प्रतिशत बढ़ी है, और अधिकांश ग्राहक उसी ruta पर पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का हवाला दे रहे हैं। ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ग्रामीण क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशन की संख्या बढ़े, तो इस प्रकार का स्विच और तेज़ी से फैल सकता है। प्रशांत ने अपनी नई बाइक की बैटरी की वारंटी तीन साल की ली है और अब तक कोई तकनीकी समस्या नहीं आई है। उन्होंने बताया कि लंबे समय में यह निवेश न केवल पैसा बचाता है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी सुधारता है। समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)

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