लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

पुतिन के भारत दौरे पर ब्रह्मोस, सुखोई और एस-400 समझौते, रक्षा साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

10/9/2026, 11:59:58 pm
पुतिन के भारत दौरे पर ब्रह्मोस, सुखोई और एस-400 समझौते, रक्षा साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार
Original publisher image
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले महीने नई दिल्ली पहुंचेंगे। यह दौरा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन की बैठक में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, सुखोई-30एमकेआई लड़ाकू विमान और एस-400 वायु रक्षा प्रणाली पर समझौते तय किए जाएंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु की अगुवाई में तकनीकी टीमें पहले से ही संयुक्त कार्ययोजना तैयार कर रही हैं। ब्रह्मोस के नए संस्करण को भारतीय नौसेना और वायु सेना के लिए अनुकूलित किया जाएगा, जबकि सुखोई-30एमकेआई के लिए अतिरिक्त इंजन और एवियोनिक्स पैकेज पर बातचीत चल रही है। एस-400 प्रणाली की डिलीवरी पहले ही शुरू हो चुकी है, लेकिन इस दौरे में इसके रखरखाव, प्रशिक्षण और सॉफ्टवेयर अपग्रेड पर विस्तृत समझौता होगा। भारतीय वायु सेना के अधिकारी कहते हैं कि एस-400 की तैनाती से उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर हवाई खतरे का मुकाबला करने की क्षमता काफी बढ़ जाएगी। पिछले वर्ष दोनों सेनाओं ने संयुक्त अभ्यास 'इंद्र-2023' में हिस्सा लिया था, जिसमें ब्रह्मोस और सुखोई का संयुक्त संचालन प्रदर्शित किया गया। उस अभ्यास के नतीजे अब नए समझौतों की बुनियाद बन रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञ अजय कुमार के अनुसार, ये सौदे भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम हैं। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते कुछ उच्च-तकनीकी उपकरणों की आपूर्ति में देरी हो सकती है। भारत ने इसके जवाब में अपने स्वदेशी मिसाइल कार्यक्रम और हल्के लड़ाकू विमान तेजस के विकास को तेज कर दिया है। सरकार ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को अतिरिक्त धन आवंटित किया है। आर्थिक मोर्चे पर भी दोनों देश ऊर्जा, उर्वरक और दवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हैं। रूसी तेल की आपूर्ति भारतीय रिफाइनरियों के लिए स्थिरता लाएगी, जबकि भारतीय दवा कंपनियां रूसी बाजार में अपनी पहुंच बढ़ा सकेंगी। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित