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पुतिन का विमान नहीं, उड़ता कमांड सेंटर; साथ चलता है 'धोखा' देने वाला दूसरा जहाज

11/9/2026, 6:20:21 am
पुतिन का विमान नहीं, उड़ता कमांड सेंटर; साथ चलता है 'धोखा' देने वाला दूसरा जहाज
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब विदेश यात्रा पर निकलते हैं, तो उनके साथ दो लगभग एक जैसे विमान उड़ते हैं। बाहर से देखने पर दोनों IL-96-300PU एकदम समान लगते हैं। लेकिन असल में ये सामान्य यात्री विमान नहीं, बल्कि उड़ता हुआ कमांड सेंटर हैं। पुतिन का मुख्य विमान 'रूस-1' कॉल साइन से जाना जाता है। इसके अंदर राष्ट्रपति के लिए खास केबिन, बैठक कक्ष, संचार उपकरण और आराम की सुविधाएं हैं। सबसे अहम है इसका संचार तंत्र — सैटेलाइट लिंक, एन्क्रिप्टेड लाइन और युद्ध की स्थिति में परमाणु कमांड देने की क्षमता। यानी हवा में भी पुतिन देश की सेना को आदेश दे सकते हैं। दूसरा विमान 'रूस-2' होता है। यह मुख्य विमान की हूबहू नकल है — वही रंग, वही नंबर, वही आकार। मकसद साफ है: दुश्मन या हमलावर को भ्रमित करना। कोई नहीं बता सकता कि पुतिन किसमें सवार हैं। दोनों विमान एक साथ टेकऑफ करते हैं, एक ही रूट पर उड़ते हैं और लगभग साथ लैंड करते हैं। यह रणनीति शीत युद्ध के दौर से चली आ रही है। सोवियत काल में भी शीर्ष नेतृत्व के लिए डिकॉय (धोखा देने वाला) विमान चलन में था। आज के IL-96 को 1990 के दशक में विशेष रूप से तैयार किया गया। रूस के वोरोनिश एविएशन प्लांट में इन्हें मॉडिफाई किया गया। हर विमान पर करीब 1600 करोड़ रुपये खर्च हुए बताए जाते हैं। सुरक्षा घेरा यहीं खत्म नहीं होता। उड़ान से पहले रनवे की जांच, ईंधन की शुद्धता, केटरिंग स्टाफ की पृष्ठभूमि — सब कुछ खुफिया एजेंसी FSO (फेडरल प्रोटेक्शन सर्विस) की निगरानी में होता है। विमान के चालक दल भी विशेष रूप से प्रशिक्षित सैन्य पायलट होते हैं। जानकार बताते हैं कि पुतिन घरेलू उड़ानों के लिए अक्सर छोटे विमान या हेलीकॉप्टर इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर IL-96 जोड़ी अनिवार्य होती है। 2023 में चीन यात्रा के दौरान भी दो विमान बीजिंग पहुंचे थे। इसी तरह अफ्रीका, मध्य पूर्व और CIS देशों की यात्राओं में यह पैटर्न दिखा। रूस का दावा है कि ये विमान मिसाइल हमले झेल सकते हैं। इनमें इन्फ्रारेड काउंटरमेजर, जैमर और चाफ-फ्लेयर सिस्टम लगे हैं। हालांकि वास्तविक युद्ध में इनकी क्षमता कभी परखी नहीं गई। पश्चिमी खुफिया एजेंसियां लंबे समय से इन उड़ानों को ट्रैक करती रही हैं। फ्लाइट रडार पर दोनों विमान दिखते हैं, लेकिन कॉल साइन बदलते रहते हैं। कभी 'रूस-1' आगे होता है, कभी 'रूस-2'। यही अनिश्चितता सुरक्षा की पहली पंक्ति है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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