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राहुल गांधी ने मनुस्मृति के श्लोक को शर्मनाक बताया, भाजपा ने किया पलटवार

22/8/2026, 3:40:15 pm
राहुल गांधी ने मनुस्मृति के श्लोक को शर्मनाक बताया, भाजपा ने किया पलटवार
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पुणे में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में मनुस्मृति के एक श्लोक को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ महिलाओं और दलितों के प्रति भेदभाव को धार्मिक स्वीकृति देता है, जो संविधान के समता और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। राहुल ने उपस्थित छात्रों से अपील की कि वे इतिहास को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि उस पर सवाल उठाएं और समानता के लिए आवाज़ बुलंद करें। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी ही सामाजिक परिवर्तन की असली ताकत है। भाजपा ने इस बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी मनुस्मृति को संदर्भ से बाहर निकालकर राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि मनुस्मृति के कई अंश प्राचीन सामाजिक व्यवस्था के दस्तावेज हैं, न कि वर्तमान कानून। भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता केवल चुनावी मौसम में विवाद खड़ा कर रहे हैं, जबकि भारतीय संविधान पहले ही हर नागरिक को बराबर अधिकार देता है। पार्टी ने अनुच्छेद 15 और 17 का हवाला देकर कहा कि जाति और लिंग के आधार पर भेदभाव पहले से प्रतिबंधित है। पुणे के स्थानीय नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों ने दोनों पक्षों की बात सुनी। कई छात्रों ने माना कि मनुस्मृति के कुछ अंश आज भी सामाजिक भेदभाव की जड़ हैं, इसलिए इस पर खुली चर्चा ज़रूरी है। दूसरी ओर, कुछ विद्वानों ने चेताया कि किसी भी प्राचीन ग्रंथ को एकतरफा निंदा करना इतिहास की जटिलता को नज़रअंदाज करता है। उन्होंने संतुलित अध्ययन और संदर्भ‑आधारित व्याख्या की मांग की। इस विवाद से फिर साबित होता है कि सामाजिक न्याय और ऐतिहासिक व्याख्या पर राजनीतिक बहस अब भी तेज़ है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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