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सावन सोमवार व्रत कथा: साहूकार के बेटे की कहानी और पूजा विधि

17/8/2026, 1:24:36 am
सावन सोमवार व्रत कथा: साहूकार के बेटे की कहानी और पूजा विधि
सावन का महीना शुरू होते ही शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। इस महीने के हर सोमवार को रखा जाने वाला व्रत खास माना जाता है। मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने से शिवजी प्रसन्न होते हैं और मनोकामना पूरी करते हैं। इस व्रत से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा साहूकार के बेटे की है। कथा के अनुसार एक नगर में धनी साहूकार रहता था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान नहीं थी। उसने शिवजी की कठोर तपस्या की। भोलेनाथ प्रसन्न हुए और वरदान दिया कि तुम्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी, लेकिन उसकी आयु केवल 12 वर्ष होगी। समय आने पर साहूकार के घर पुत्र ने जन्म लिया। साहूकार ने उसका नाम अमर रखा। जब अमर 11 वर्ष का हुआ तो साहूकार को उसकी अल्पायु की चिंता सताने लगी। उसने बेटे को मामा के साथ काशी पढ़ने भेज दिया। रास्ते में एक राजकुमारी का विवाह हो रहा था। दूल्हा एक आंख से काना था। उसके पिता ने अमर को दूल्हा बनाकर विवाह करवा दिया। अमर ने राजकुमारी की चुनरी पर लिख दिया कि तुम्हारा विवाह मुझसे हुआ है, लेकिन मैं काशी पढ़ने जा रहा हूं। अमर काशी पहुंचकर शिवजी की पूजा में लग गया। 12वें वर्ष उसके प्राण लेने यमदूत आए, लेकिन शिवजी की कृपा से यमराज को लौटना पड़ा। शिवजी ने अमर को दीर्घायु का वरदान दिया। अमर लौटकर राजकुमारी के साथ सुखी जीवन बिताया। इस कथा का सार है कि सच्ची श्रद्धा से सावन सोमवार व्रत रखने पर शिवजी हर संकट से उबारते हैं। व्रत वाले दिन सुबह स्नान कर शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा चढ़ाएं। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। दिन में फलाहार लें और शाम को शिव आरती के बाद व्रत खोलें। बेतिया समेत पूरे बिहार में इस व्रत को बड़ी आस्था से मनाया जाता है। मंदिरों में विशेष सजावट होती है और भजन-कीर्तन चलते हैं। जानकार बताते हैं कि व्रत का पालन श्रद्धा और नियम से करना चाहिए, तभी फल मिलता है।
समाचार स्रोत: Google News — Bettiah (Hindi)

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