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एससीओ शिखर सम्मेलन 2026: बिश्केक में मोदी की रणनीति और भारत के लिए अहमियत

30/8/2026, 9:40:08 pm
एससीओ शिखर सम्मेलन 2026: बिश्केक में मोदी की रणनीति और भारत के लिए अहमियत
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे जहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का वार्षिक शिखर सम्मेलन चल रहा है। एससीओ में अब दस देश शामिल हैं — चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, भारत, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस। इन देशों की कुल जीडीपी विश्व की लगभग 23 प्रतिशत है और उनकी संयुक्त सैन्य शक्ति भी बड़ी है। भारत 2017 में पूर्ण सदस्य बना था। तब से वह संगठन में आतंकवाद विरोधी सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, परिवहन गलियारे और डिजिटल संपर्क पर जोर देता रहा है। इस साल की बैठक इसलिए ज्यादा अहम है क्योंकि क्षेत्र में चीन का प्रभाव बढ़ रहा है और अफगानिस्तान की स्थिति अब भी अनिश्चित है। मोदी की रणनीति तीन स्तरों पर काम करती है। पहला, क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं जैसे अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) को तेज करना ताकि भारत मध्य एशिया और यूरोप तक माल पहुंचा सके। दूसरा, आतंकवाद के खिलाफ साझा खुफिया तंत्र मजबूत करना, खासकर पाकिस्तान स्थित समूहों पर नजर रखने के लिए। तीसरा, ऊर्जा और खनिज संसाधनों में संयुक्त निवेश के जरिए आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाना। चीन और रूस दोनों एससीओ में बड़ी भूमिका निभाते हैं। भारत चाहता है कि संगठन किसी एक देश के प्रभुत्व में न रहे, बल्कि सहमति आधारित फैसले ले। इसलिए मोदी ने द्विपक्षीय बैठकों में चीन के साथ सीमा तनाव कम करने और रूस के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। सम्मेलन के घोषणापत्र में आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर साझा कार्य योजना शामिल होने की उम्मीद है। भारत के लिए यह मंच अपनी 'पड़ोसी पहले' नीति को मध्य एशिया तक विस्तारित करने का मौका देता है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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