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सीमा कुमारी: घर से पंचायत तक का प्रेरक सफ़र

4/9/2026, 9:52:56 am
सीमा कुमारी: घर से पंचायत तक का प्रेरक सफ़र
सीमा कुमारी का जन्म बिहार के मधुबनी जिले के एक छोटे गांव में हुआ था। उनके पिता किसान थे और घर की आर्थिक स्थिति सख्त थी। बचपन में ही उन्होंने भाई‑बहनों की पढ़ाई में मदद की। स्कूल जाने के लिए उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। बारिश के मौसम में रास्ता कीचड़ में बदल जाता, फिर भी वे कभी नहीं रुकीं। इस संघर्ष ने उनके अंदर दृढ़ता का बीज बोया। कक्षा दस तक पढ़ने के बाद सीमा ने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की। हालांकि आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण वे निजी कोचिंग नहीं कर पाईं। उन्होंने खुद किताबें खरीदकर और ऑनलाइन सामग्री का उपयोग करके पढ़ाई की। इसी दौरान उन्होंने गांव की महिलाओं को साक्षरता अभियान में जोड़ना शुरू किया। साप्ताहिक बैठकों में वे पढ़ाई लिखाई के साथ‑साथ स्वास्थ्य और hygienic practices पर चर्चा करतीं। धीरे‑धीरे महिलाओं की भागीदारी बढ़ने लगी। 2018 में सीमा ने पंचायत चुनाव में उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। उनके चुनावी मुद्दे थे: पेयजल की सुधार, सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन और महिला स्व‑सहायता समूहों को मजबूत करना। गांव के युवा और बुजुर्ग दोनों ने उनका समर्थन किया। चुनाव परिणाम घोषित हुए तो सीमा ने बहुमत से जीत हासिल की। वे अपने क्षेत्र की पहली महिला पंचायत सदस्य बनीं। इस जीत ने आसपास के गांवों में भी महिलाओं को राजनीति में आने की प्रेरणा दी। पंचायत में कार्यभार संभालने के बाद सीमा ने सबसे पहले पेयजल टंकी की मरम्मत करवाई। इसके बाद उन्होंने शौचालय निर्माण की योजना शुरू की, जिससे खुले में शौच की प्रथा घटनी शुरू हुई। इन प्रयासों से गांव के स्वास्थ्य सूचक में सुधार आया। सीमा ने महिला स्व‑सहायता समूहों को Micro‑finance से जोड़ने का काम भी किया। समूह की महिलाएँ अब सिलाई, handicraft और कृषि‑आधारित उत्पाद बनाकर आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके आर्थिक स्वायत्तता में वृद्धि हुई। उनके नेतृत्व में पंचायत ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पचास से अधिक घरों का निर्माण पूरा किया। लाभान्वित परिवारों ने बताया कि अब उनके बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान दे पा रहे हैं। यह बदलाव सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक कदम है। सीमा लगातार ग्राम सभा की बैठकों में भाग लेती हैं और पारदर्शी तरीके से धन का उपयोग सुनिश्चित करती हैं। उन्होंने एक शिकायत निवारण पोर्टल भी शुरू किया, जहाँ ग्रामीण अपनी समस्याएँ ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इससे प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ी है। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने उन्हें उत्कृष्ट महिला नेता का पुरस्कार दिया। सीमा कहते हैं कि इस पुरस्कार का श्रेय उन महिलाओं को जाता है जो हर दिन संघर्ष करती हैं। उनकी विनम्रता ने लोगों के दिलों में जगह बनाई। सीमा कुमारी की कहानी बताती है कि दृढ़ संकल्प और सामुदायिक समर्थन से कोई भी बाधा पार की जा सकती है। उनका सफ़र घर से पंचायत तक न केवल व्यक्तिगत जीत है, बल्कि बिहार की महिलाओं के लिए एक नई दिशा दिखाता है। समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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