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बिहार में भीषण बाढ़: 14 जिलों में 44 लाख लोग फंसे, आठ नदियां खतरे के निशान से ऊपर

11/9/2026, 12:18:48 am
बिहार में भीषण बाढ़: 14 जिलों में 44 लाख लोग फंसे, आठ नदियां खतरे के निशान से ऊपर
बिहार में लगातार बारिश के कारण कई नदियों का जल स्तर तेजी से बढ़ गया है. उत्तर और मध्य भागों में स्थित 14 जिले इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हैं. प्रशासनिक आकलन के अनुसार, लगभग 44 लाख लोग अपने घरों से बाहर निकलकर अस्थायी शिविरों में शरण ले रहे हैं. स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन कुछ इलाकों में संपर्क अभी भी कटा हुआ है. आठ प्रमुख नदियों – कोसी, गंडक, बागमती, कमला, बलान, अधवारा, महानंदा और पुनपुन – ने खतरे के निशान को पार कर लिया है. विशेष रूप से कोसी नदी के जल प्रवाह में अचानक वृद्धि हुई है, जिसने पश्चिमी चंपारण जिले में रेलवे ट्रैक के पास बने बांध को क्षतिग्रस्त कर दिया है. इस बांध के टूटने से रेल संचालन ठप्प हो गया है और कई ट्रेनों के मार्ग बदलने पड़े हैं. रेल अधिकारियों ने बताया कि मरम्मत का काम जारी है, लेकिन पूरी तरह से ट्रैक सुचारू होने में कुछ दिन लग सकते हैं. बाढ़ के कारण फसलों को नुकसान हुआ है, खासकर धान और मक्का की खड़ी फसल पानी में डूब गई है. किसान संगठनों ने तत्काल मुआवजा और बीमा क्लेम की प्रक्रिया तेज करने की मांग की है. राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में खाद्य पैकेट, पीने का शुद्ध पानी और दवाइयों की आपूर्ति बढ़ा दी है. साथ ही, हेलीकॉप्टरों से उन गाँवों तक सामग्री पहुंचाई जा रही है जहां सड़क मार्ग पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं. पशुधन भी बड़ी संख्या में प्रभावित हुआ है; कई गाय और भैंस पानी में फंस गए हैं, जिसके कारण पशुपालकों को चारा और दवा की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. जिला स्तर पर वैटरिनरी टीमें जानवरों का इलाज कर रही हैं और सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है. बाढ़ के कारण सैकड़ों स्कूल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं. बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए ऑनलाइन कक्षाओं और सामुदायिक केंद्रों में छोटे समूहों में पढ़ाई की व्यवस्था की गई है. कई गैर‑सरकारी संगठन भी राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं और स्वच्छता किट बांट रहे हैं ताकि महामारी का खतरा कम हो. मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 घंटों में बारिश की तीव्रता में कमी आएगी, पर नदियों का जल स्तर अभी उच्च रहेगा. इसलिए बचाव और राहत कार्य जारी रखने की आवश्यकता है. विशेष टीमें तैरने वाले उपकरण और नावों के माध्यम से फंसे हुए लोगों को निकाल रही हैं. सामुदायिक रसोईयां स्थापित की गई हैं ताकि प्रभावित परिवारों को गरम भोजन मिल सके. स्वास्थ्य विभाग ने पानी जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए टीकाकरण क्लिनिक भी लगाए हैं. अधिकारियों ने अपील की है कि नागरिक सुरक्षित स्थानों पर रहें और अनावश्यक यात्रा से बचें. समन्वय पर बल देते हुए, केंद्र सरकार ने अतिरिक्त राहत कोष जारी करने का निर्णय लिया है. समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
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