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भारत

18 वर्षीय शिवानी ने माउंट एल्ब्रुस पर लहराया भारत का तिरंगा

6/9/2026, 11:53:13 pm
18 वर्षीय शिवानी ने माउंट एल्ब्रुस पर लहराया भारत का तिरंगा
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उत्तराखंड के पिथोरागढ़ जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाली अठारह वर्षीय शिवानी मेहरोत्रा ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर भारत का तिरंगा फहराकर एक नया मुकाम हासिल किया। उनके पिता खेती करते हैं और माँ घर की देखभाल करती हैं, जिससे शिवानी को बचपन से ही घर के कामकाज में हाथ बंटाना पड़ता था। फिर भी वह सुबह सूरज उगने से पहले दौड़ लगाती और स्थानीय पहाड़ी पगडंडियों पर चढ़ने का अभ्यास करती थीं। गांव के एक सेवानिवृत्त पर्वतारोही ने शिवानी को बुनियादी तकनीक सिखाई और पुराने उपकरण जमा करने में मदद की। उन्होंने रोजाना दस किलोमीटर की दौड़, एक घंटे का योग और सप्ताह में दो बार नजदीकी पहाड़ियों पर ट्रेकिंग की शुरुआत की। पोषण के लिए उन्होंने घर की दाल, सब्जी और मौसमी फल का सेवन जारी रखा। इस अनुशासन ने उनकी स्टेमिना और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ाया। पिछले साल उन्होंने राज्य स्तर की एक ट्रेकिंग प्रतियोगिता जीती, जिसकी बदौलत एक स्थानीय एनजीओ से स्पॉन्सरशिप मिली। इस सहायता से शिवानी ने रूस की यात्रा की तैयारी की और आवश्यक गियर, ऑक्सीजन सिलेंडर और मौसम प्रतिरोधी कपड़े खरीदे। रूस पहुंचने पर उन्होंने पेशेवर गाइड के साथ बेस कैंप तक की अर्जेंट ट्रेनिंग ली। चढ़ाई के दौरान मौसम तेजी से बदल गया और हवा की गति बढ़ी, जिससे सांस लेने में कठिनाई हुई। टीम में दो अनुभवी शेरपा और एक मेडिकल ऑफिसर शामिल थे, जिन्होंने उच्च ऊंचाई पर होने वाली बीमारियों के लक्षणों की निगरानी की। शिवानी को सिरदर्द और थकान महसूस हुई लेकिन उन्होंने दवा और आराम के बीच संतुलन बनाते हुए चढ़ाई जारी रखी। 5,642 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचते ही उन्होंने भारतीय तिरंगा फहराया और कुछ क्षणों के लिए शांति से दृश्य को निहारा। इस पल को देखकर उनके yeux में खुशी के आंसू आए। शिवानी ने कहा कि पहाड़ सिखाते हैं कि मुश्किलें पार की जा सकती हैं और वह चाहती हैं कि अन्य लड़कियाँ भी अपने सपनों को पकड़ें। गांव में इस उपलब्धि का जश्न मनाया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने उन्हें सम्मानित करने की घोषणा की है और स्कूल के प्रिंसिपल ने उनकी कहानी छात्रों को सुनाई, जिससे कई युवा प्रेरित हुए। शिवानी के माता‑पिता भी बेटी के साहस से गर्व महसूस कर रहे हैं। अब शिवानी अपने अगले लक्ष्य की ओर देख रही हैं — आगामी वर्ष में एवरेस्ट बेस कैंप तक की ट्रेकिंग और फिर शिखर चढ़ाई की तैयारी। उन्होंने बताया कि वे अपनी कमाई का हिस्सा गांव के खेल सुविधाओं के लिए जमा करेंगी। यह कहानी साबित करती है कि उम्र और पारिवारिक जिम्मेदारी किसी भी लक्ष्य को रोक नहीं सकती। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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