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सिक्किम ने नेपाल बाढ़ पीड़ितों को राहत भेजी, सीएम तमांग ने दिखाई हरी झंडी
31/8/2026, 12:58:33 am

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नेपाल में पिछले हफ्ते हुई भारी बारिश के बाद आई बाढ़ ने कई जिलों को तबाह कर दिया है। लाखों लोग बेघर हो गए हैं, फसलें डूब गई हैं और सड़कें टूट गई हैं। राहत की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बाढ़ से अब तक 12 जिले प्रभावित हुए हैं और 45 हजार से अधिक परिवार विस्थापित हुए हैं। मृतकों की संख्या 120 के पार पहुंच चुकी है।
इस संकट में सिक्किम सरकार ने तेजी से कदम उठाया। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने शनिवार को गंगटोक में “सिक्किम फॉर नेपाल” अभियान की शुरुआत की और राहत सामग्री लेकर एक दल को नेपाल रवाना किया। उन्होंने खुद हरी झंडी दिखाई और दल के सदस्यों से बात की।
दल में चिकित्सा कर्मी, इंजीनियर, स्वयंसेवक और संचार विशेषज्ञ शामिल हैं। उनके पास टेंट, पीने का पानी, खाद्य पैकेट, दवाएं, बिजली जनरेटर और सैटेलाइट फोन जैसी जरूरी चीजें हैं। सामग्री को ट्रकों और हेलीकॉप्टरों से भेजा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाते हुए कहा, “पड़ोसी की मदद करना हमारा फर्ज है। हम नेपाल के लोगों के साथ खड़े हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि सिक्किम की सीमा से लगे इलाकों में भी बचाव कार्य चल रहे हैं और स्थानीय प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।
सिक्किम ने इससे पहले भी 2022 में नेपाल में आए भूकंप के बाद राहत अभियान चलाया था, जिससे दोनों राज्यों के बीच सहयोग की परंपरा मजबूत हुई है।
नेपाल सरकार ने सिक्किम की इस पहल का स्वागत किया और कहा कि यह सहायता समय पर पहुंचने से हजारों परिवारों को राहत मिलेगी। दोनों देशों के अधिकारियों ने समन्वय के लिए एक संयुक्त कंट्रोल रूम बनाया है जो हर घंटे स्थिति की समीक्षा करेगा।
स्थानीय लोगों ने भी इस कदम की सराहना की। गंगटोक के निवासी रमेश शर्मा ने कहा, “यह देखकर अच्छा लगता है कि हमारा राज्य दूसरों की मदद के लिए आगे आता है।” अन्य नागरिकों ने भी सोशल मीडिया पर समर्थन व्यक्त किया।
सिक्किम के मुख्य सचिव ने बताया कि अगले सप्ताह एक और मेडिकल टीम और पानी शुद्धिकरण इकाई भेजी जाएगी, ताकि बीमारियों का प्रसार रोका जा सके।
आने वाले दिनों में और राहत सामग्री भेजी जाएगी। सिक्किम प्रशासन ने कहा कि वे स्थिति पर नजर रखेंगे और जरूरत के मुताबिक मदद बढ़ाएंगे।
दोनों देशों के विदेश मंत्रालय भी स्थिति पर नजर रख रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने पर सहमत हुए हैं।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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