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एसएसबी देगा सीमाई युवतियों को सिलाई‑ब्यूटी प्रशिक्षण, बनेगी आत्मनिर्भर

9/9/2026, 1:13:00 pm
एसएसबी देगा सीमाई युवतियों को सिलाई‑ब्यूटी प्रशिक्षण, बनेगी आत्मनिर्भर
एसएसबी ने भारत‑नेपाल सीमा पर रहने वाली युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक नया कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सिलाई और ब्यूटी पार्लर के क्षेत्र में व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है, ताकि वे स्थानीय स्तर पर रोजगार या स्वरोजगार के अवसर हासिल कर सकें। सिलाई प्रशिक्षण में बुनियादी सिलाई मशीन चलाना, कपड़ा काटना, सिलाई technic, ड्रेस मेकिंग और सुधार कार्य शामिल हैं। जबकि ब्यूटी पार्लर ट्रेनिंग में बाल काटना, हेयर स्टाइलिंग, मेकअप बेसिक, स्किन केयर और नेल आर्ट जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। दोनों कोर्सों की अवधि तीन महीने रखी गई है, जिसमें सप्ताह में पाँच दिन कक्षाएँ लगाई जाती हैं। इस पहल का लक्ष्य उन गाँवों की युवतियाँ हैं जो सीमा से पचास किलोमीटर के दायरे में रहती हैं। इन इलाकों में शिक्षा और रोजगार के संसाधन सीमित हैं, इसलिए कई युवतियाँ घर की जिम्मेदारियों में फँस जाती हैं। एसएसबी ने स्थानीय पंचायतों और महिला समूहों के सहयोग से उम्मीदवारों का चयन किया है, जिससे पारदर्शी और समावेशी प्रक्रिया सुनिश्चित होती है। प्रशिक्षण के लिए एसएसबी ने अपने प्रशिक्षण centra में विशेष कक्षाएँ तैयार की हैं, जहाँ आधुनिक सिलाई मशीनें, ब्यूटी टूल्स और आवश्यक सुरक्षा उपकरण मौजूद हैं। अनुभवी प्रशिक्षक, जो पूर्व में सरकारी कौशल विकास संस्थानों में काम कर चुके हैं, teoretical और व्यावहारिक दोनों सत्र लेते हैं। प्रत्येक बैच में बीस से पच्चीस प्रशिक्षु रखे जाते हैं, ताकिindividual ध्यान दिया जा सके। कार्यक्रम पूरा होने पर प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र दिया जाता है, जो राज्य政府 के कौशल विकास पोर्टल पर मान्य है। इस प्रमाणपत्र की मदद से वे microlender से लोन लेकर अपना छोटा सिलाई केंद्र या ब्यूटी parlour खोल सकते हैं। कई प्रतिभागियों ने पहले ही घर के पास काम शुरू करने की योजना बनाई है, जिससे उनकी परिवार की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है। इस योजना के लिए वित्तीय समर्थन गृह मंत्रालय की सीमा क्षेत्र विकास निधि से मिल रहा है। साथ ही, जिला प्रशासन और राज्य कौशल विकास मिशन भी लॉजिस्टिक्स और प्लेसमेंट में सहयोग कर रहे हैं। समय‑समय पर मॉनिटरिंग कमेटी प्रगति की समीक्षा करती है और आवश्यक सुधार करती है। प्रशिक्षुओं में से कई ने बताया कि पहले वे कभी सपने में भी ऐसा कौशल सीखने की कल्पना नहीं कर पाती थीं। अब वे आत्मविश्वास से भरी हैं और अपने गाँव में अन्य लड़कियों को प्रेरित करना चाहती हैं। स्थानीय पंचायत के सरपंच ने कहा कि ऐसी पहल से सीमा क्षेत्र में सामाजिक बदलाव आएगा और पलायन की प्रवृत्ति कम होगी। एसएसबी ने भविष्य में इसी मॉडल को अन्य सीमावर्ती जिलों में भी विस्तार करने की योजना बनाई है। अगले साल में दो नए कोर्स—कम्प्यूटर बेसिक और कृषि प्रसंस्करण—जोड़ने पर चर्चा चल रही है। लक्ष्य है कि पाँच साल के भीतर पाँच हजार से अधिक युवतियों को प्रशिक्षित करके उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए। समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)

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