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₹22 हज़ार करोड़ का दावा और ₹6.5 करोड़ की पेशकश: राहुल गांधी का तंज, NCLT पर सवाल

27/8/2026, 5:16:07 am
₹22 हज़ार करोड़ का दावा और ₹6.5 करोड़ की पेशकश: राहुल गांधी का तंज, NCLT पर सवाल
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सुभाष चंद्रा, ज़ी मीडिया समूह के प्रमुख, पर कर्जदाताओं द्वारा ₹22 हज़ार करोड़ का दावा ठोका गया है। दावा करने वाले पक्ष का कहना है कि इस रकम की वसूली ज़रूरी है क्योंकि कंपनी की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ रही है। इसके जवाब में सुभाष चंद्रा ने केवल ₹6.5 करोड़ का भुगतान करने की पेशकश की है, जिसे वे उचित समाधान मानते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस असंतुलन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। एक सार्वजनिक बयान में उन्होंने कहा, "NCLT अब लूट ट्रिब्यूनल बन गया है, जहां बड़े कारोबारी थोड़ा चुकाकर बड़े कर्ज से बच जाते हैं।" इस टिप्पणी ने मीडिया में व्यापक चर्चा शुरू कर दी और विपक्षी दलों ने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। विवाद का केंद्र यह है कि राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (NCLT) को दिवाला और शोधन प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभानी होती है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि इसका निर्णय अक्सर बड़े conglomerates के पक्ष में झुकता है। इस मामले में, यदि ट्रिब्यूनल सुभाष चंद्रा की कम पेशकश को स्वीकार करता है, तो छोटे कर्जदाताओं को भारी नुकसान हो सकता है और प्रणाली में भरोसा कमजोर हो सकता है। सुभाष चंद्रा ने अपने बयान में कहा कि प्रस्तावित राशि कंपनी की वर्तमान संपत्ति और देनदारियों के आकलन पर आधारित है। उन्होंने ज़ी मीडिया के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए re‑structuring योजना पेश की है, जिसमें कुछ संपत्तियों के विलय और कर्ज की पुनर्नियुक्ति शामिल है। कर्जदाताओं की समिति अभी इस योजना पर विचार कर रही है और अंतिम निर्णय आने वाले हफ्तों में लिया जा सकता है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले का outcome न केवल Zee Media के शेयर価格 को प्रभावित करेगा, बल्कि अन्य मीडिया और मनोरंजन कंपनियों के दिवाला प्रक्रियाओं के लिए एक पूर्व례 भी स्थापित कर सकता है। अब तक की स्थिति बताती है कि विधि, वित्त और राजनीति के बीच का तनाव कितना गहरा हो गया है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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