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शोर के ख़िलाफ़ 20 साल की जंग: सुमैरा अब्दुलाली की आवाज़

13/9/2026, 10:29:57 am
शोर के ख़िलाफ़ 20 साल की जंग: सुमैरा अब्दुलाली की आवाज़
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सुमैरा अब्दुलाली पिछले बीस साल से शोर के खिलाफ आवाज उठा रही हैं। वह मुंबई की सड़कों पर, दरगाह के मेले में और गणपति उत्सव के दौरान होने वाले शोर को रिकॉर्ड करती हैं। उनके पास एक छोटा सा माइक्रोफोन और एक नोटबुक है। वह हर आयोजन में जाकर डेटा जुटाती हैं और फिर अधिकारियों को रिपोर्ट भेजती हैं। सुमैरा कहती हैं कि शोर केवल कानों को ही नहीं, दिल और दिमाग को भी बीमार करता है। उन्होंने कई बार नगर निगम और पुलिस को चिट्ठी लिखी, लेकिन जवाब धीमा मिला। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने जनता को जागरूक करने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और मोहल्ले की बैठकों में बात की। लोग अब अपने आसपास के शोर को नोट करने लगे हैं। पिछले साल उन्होंने एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया, जिससे कोई भी नागरिक शोर का स्तर रिकॉर्ड कर सके। ऐप के डेटा से प्रशासन पर दबाव बढ़ा। आज भी वह हर बड़े त्योहार से पहले अधिकारियों से मिलती हैं और शोर सीमा तय करने की मांग करती हैं। उनका मानना है कि शांत शहर स्वस्थ शहर होता है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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