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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा: बीसीसीआई और राज्य संघ राष्ट्रीय खेल शासन कानून से बाहर क्यों?

8/9/2026, 8:29:26 pm
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा: बीसीसीआई और राज्य संघ राष्ट्रीय खेल शासन कानून से बाहर क्यों?
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बीसीसीआई और सभी राज्य क्रिकेट संघों को राष्ट्रीय खेल शासन कानून (एनएसजीए) के दायरे में लाने पर सख्त सवाल उठाया। अदालत ने पूछा कि क्रिकेट को अन्य खेलों की तरह नियमित क्यों नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि कानून का मकसद सभी खेल निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है। फिर भी बीसीसीआई और राज्य संघ अब तक इससे बाहर हैं। केंद्र सरकार ने 2023 में एनएसजीए पारित किया था। इसमें खेल संघों के चुनाव, वित्तीय ऑडिट और खिलाड़ियों के कल्याण के प्रावधान हैं। कानून लागू होने के बाद भी क्रिकेट बोर्ड ने अपने संविधान में बदलाव नहीं किया। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि बीसीसीआई को विशेष दर्जा देने से दूसरे खेलों के साथ भेदभाव होता है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट की लोकप्रियता का इस्तेमाल नियमों से बचने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने केंद्र से पूछा कि क्या वह बीसीसीआई को कानून के दायरे में लाने के लिए कोई कदम उठा रही है। सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दिया कि सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है, लेकिन अभी कोई ठोस प्रस्ताव नहीं है। बीसीसीआई के वकील ने तर्क दिया कि क्रिकेट बोर्ड एक निजी संस्था है और उसके आंतरिक मामलों में सरकारी हस्तक्षेप उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि बोर्ड पहले से ही पारदर्शिता के कई कदम उठा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वह इस मामले पर विस्तृत आदेश देगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि बीसीसीआई कानून का पालन नहीं करती तो उसे न्यायिक आदेश का सामना करना पड़ सकता है। खेल मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि एनएसजीए के तहत सभी खेल संघों को एक समान नियमों का पालन करना होगा। इससे खिलाड़ियों के हितों की रक्षा होगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। इस फैसले का असर क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों पर भी पड़ेगा। यदि बीसीसीआई को कानून के दायरे में लाया जाता है, तो दूसरे खेल संघ भी इसी तरह की जवाबदेही के लिए बाध्य होंगे। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश पर टिकी हैं। यह निर्णय भारतीय खेल प्रशासन की दिशा तय करेगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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