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सुप्रीम कोर्ट का सीपीसीबी को निर्देश: दिवाली से पहले पटाखों की शोर सीमा पर फिर से विचार करे

20/8/2026, 3:01:21 am
सुप्रीम कोर्ट का सीपीसीबी को निर्देश: दिवाली से पहले पटाखों की शोर सीमा पर फिर से विचार करे
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को निर्देश दिया कि वह दिवाली से पहले पटाखों के शोर की तय सीमा और उसमें दी जाने वाली ढील पर नए सिरे से विचार करे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पर्यावरण और लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए मौजूदा मानकों की समीक्षा जरूरी है। अदालत ने सीपीसीबी से पूछा कि क्या पटाखों के शोर की वर्तमान सीमा 125 डेसीबल (एआई) पर बनी रहनी चाहिए या इसमें कोई बदलाव किया जा सकता है। पीठ ने यह भी जानना चाहा कि क्या 'ग्रीन पटाखों' के मानकों का पालन जमीन पर हो रहा है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि दिवाली पर पटाखों का शोर बुजुर्गों, बीमारों और बच्चों के लिए खतरनाक साबित होता है। वहीं पटाखा निर्माताओं के वकील ने दलील दी कि उद्योग पहले ही बड़े नुकसान झेल चुका है और कुछ व्यावहारिक ढील दी जानी चाहिए। सीपीसीबी के वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि बोर्ड वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। पीठ ने इसके लिए चार हफ्ते का समय दिया है। अगली सुनवाई में बोर्ड को बताना होगा कि शोर सीमा में बदलाव संभव है या नहीं और यदि हां, तो उसके क्या पैमाने होंगे। पिछले सालों में सुप्रीम कोर्ट ने केवल 'ग्रीन पटाखों' की बिक्री और इस्तेमाल की इजाजत दी थी। साथ ही रात दस बजे के बाद पटाखे चलाने पर रोक लगाई थी। इस बार भी अदालत का जोर संतुलन बनाने पर है — त्योहार की खुशी बनी रहे, लेकिन हवा और शोर का स्तर खतरनाक न हो। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि शोर सीमा कड़ी रखने के साथ-साथ उसके पालन की निगरानी भी उतनी ही जरूरी है। कई शहरों में दिवाली के बाद वायु गुणवत्ता सूचकांक 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच जाता है। सीपीसीबी की नई रिपोर्ट से तय होगा कि इस बार दिवाली कितनी शोरगुल वाली होगी।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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