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सुप्रीम कोर्ट: माता‑पिता के समझौते से बेटी का हक खत्म नहीं होता

25/8/2026, 2:11:43 am
सुप्रीम कोर्ट: माता‑पिता के समझौते से बेटी का हक खत्म नहीं होता
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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि माता‑पिता के बीच किसी निजी समझौते से बेटी का कानूनी हक खत्म नहीं होता। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने एक संपत्ति विवाद में यह टिप्पणी की जहां पति‑पत्नी ने आपसी सहमति से जमीन का बंटवारा किया और बेटी को कोई हिस्सा नहीं दिया। अदालत ने कहा कि बेटी का अधिकार संविधान और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 6 से मिलता है, न कि माता‑पिता की मर्जी से। इसलिए कोई भी निजी करार उसके हिस्से को छीन नहीं सकता। यह मामला दिल्ली की एक पारिवारिक संपत्ति से जुड़ा था, जहां पिता ने अपनी पत्नी के साथ एक समझौता किया और बेटी को हिस्सा नहीं दिया। बेटी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन हाई कोर्ट ने समझौते को मान्य करार दिया। इसके बाद बेटी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया। फैसले में बेंच ने यह भी कहा कि लिंग के आधार पर भेदभाव असंवैधानिक है। अगर दंपती किसी समझौते में बेटी का नाम शामिल नहीं करते, तो बेटी अदालत में उस समझौते को चुनौती दे सकती है। इस निर्णय से उत्तराधिकार कानून की धारा 6 को और मजबूती मिली है, जिसमें 2005 के संशोधन के बाद बेटियों को पुत्रों के बराबर हिस्सा दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी 2020 के विनोद कुमार बनाम स्टेट ऑफ हरियाणा मामले में कहा था कि बेटी का उत्तराधिकार हक किसी निजी करार से समाप्त नहीं हो सकता। ताजा फैसला उसी सिद्धांत को दोहराता है और इसे और स्पष्ट करता है। कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला देश भर के परिवारों पर सीधा असर डालेगा, खासकर उन इलाकों में जहां बेटियों को संपत्ति से वंचित रखा जाता है। अब कोई भी दंपती बेटी को हिस्सा देने से इनकार नहीं कर सकेगा, भले ही वे आपस में कोई भी समझौता कर लें। अदालत ने साफ किया कि समझौता केवल पक्षकारों के बीच बाध्यकारी होता है, वह तीसरे पक्ष के अधिकारों को प्रभावित नहीं कर सकता। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस निर्णय का स्वागत किया है और कहा कि यह लिंग समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है। आने वाले दिनों में इस फैसले के आधार पर कई लंबित मामलों में बेटियों को उनका हक मिलने की उम्मीद है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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