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सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी में फैसले जारी किए, जन सूचना सेवा का विस्तार

14/9/2026, 11:26:19 pm
सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी में फैसले जारी किए, जन सूचना सेवा का विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी भाषा को सरल बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब शीर्ष अदालत के फैसले हिंदी में भी पढ़े जा सकेंगे। इस पहल का मकसद आम नागरिक को अदालती निर्णय समझने में मदद करना है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को घोषणा की कि जन सूचना सेवा के तहत सभी नए फैसले हिंदी अनुवाद के साथ वेबसाइट पर डाले जाएंगे। पुराने महत्वपूर्ण फैसलों का भी चरणबद्ध अनुवाद शुरू हो चुका है। इस काम के लिए एक विशेष अनुवाद टीम बनाई गई है। जन सूचना सेवा पहले से ही नागरिकों को अदालती आदेशों की जानकारी देती रही है। अब हिंदी संस्करण जोड़ने से ग्रामीण और छोटे शहरों के लोग भी बिना वकील के फैसला पढ़ सकेंगे। वेबसाइट पर हिंदी टैब अलग से दिखेगा और पीडीएफ डाउनलोड की सुविधा भी होगी। कानूनी विशेषज्ञों ने इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि भाषा की बाधा दूर होने से न्याय की पहुंच बढ़ेगी। साथ ही हिंदी अनुवाद की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए एक समिति बनाई गई है। समिति में वरिष्ठ वकील, भाषा विशेषज्ञ और तकनीकी अधिकारी शामिल हैं। अनुवाद प्रक्रिया में मूल अंग्रेजी फैसले का अर्थ बरकरार रखने पर जोर दिया जा रहा है। हर पैराग्राफ की दोबारा जांच होगी ताकि कानूनी शब्दावली का सही हिंदी रूप सामने आए। गलत अनुवाद से भ्रम न फैले, इसके लिए ऑटोमेटेड टूल के साथ मानवीय समीक्षा भी होगी। आने वाले महीनों में अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी फैसले उपलब्ध कराने की योजना है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पारदर्शिता और नागरिक सहभागिता ही लोकतंत्र की मजबूती का आधार हैं। इसके लिए राज्य सरकारों और भाषा अकादमियों से सहयोग लिया जाएगा। इस पहल का असर पहले ही दिखने लगा है। कई गैर-सरकारी संगठनों ने हिंदी फैसलों का उपयोग करके ग्रामीण महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया है। सोशल मीडिया पर भी हिंदी फैसले तेजी से शेयर हो रहे हैं। नागरिक अब अपनी शिकायत या सुझाव सीधे जन सूचना सेवा पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। अदालत ने कहा कि जनता की प्रतिक्रिया से अनुवाद की गुणवत्ता और पहुंच दोनों सुधरेंगी। यह कदम न्याय प्रणाली को जनता के और करीब लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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