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सुप्रीम कोर्ट ने BCI के हर नीतिगत फैसले में AG और SG की भागीदारी अनिवार्य की; ऑयल इंडिया को नई याचिका की अनुमति

1/9/2026, 8:20:34 pm
सुप्रीम कोर्ट ने BCI के हर नीतिगत फैसले में AG और SG की भागीदारी अनिवार्य की; ऑयल इंडिया को नई याचिका की अनुमति
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सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के हर नीतिगत फैसले में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की भागीदारी को अनिवार्य कर दिया है। अदालत ने कहा कि कानूनी पेशे से जुड़े बड़े निर्णय बिना केंद्र सरकार के शीर्ष विधि अधिकारियों की राय के नहीं लिए जा सकते। इस फैसले से बीसीआई की स्वायत्तता पर सीधा असर पड़ेगा और अब हर नई नीति या संशोधन के लिए दोनों अधिकारियों की सहमति लेनी होगी। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि बीसीआई अपने नियमों में मनमाने बदलाव कर रहा है, जिससे वकीलों के हित प्रभावित हो रहे हैं। कोर्ट ने माना कि विधि व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केंद्र के शीर्ष कानून अधिकारियों का शामिल होना जरूरी है। इसी सुनवाई में ऑयल इंडिया लिमिटेड को भी राहत मिली। कंपनी ने अपने ड्रिलिंग प्रोजेक्ट के लिए नई याचिका दायर करने की अनुमति मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अर्जी स्वीकार करते हुए कहा कि कंपनी नए तथ्यों के साथ फिर से अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है। इससे ऑयल इंडिया को अपने प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में बीसीआई के नियमों में बदलाव पर रोक लगाई थी। तब अदालत ने कहा था कि बार काउंसिल को अपने फैसलों में पारदर्शिता बरतनी चाहिए। नया आदेश उसी कड़ी को आगे बढ़ाता है। ऑयल इंडिया लिमिटेड असम के नुमालीगढ़ इलाके में नए तेल कुएं खोदना चाहती है। पर्यावरण मंजूरी और भूमि अधिग्रहण को लेकर कई याचिकाएं लंबित हैं। अदालत की अनुमति से कंपनी अब नए तथ्यों के साथ फिर से याचिका लगा सकेगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला बार काउंसिल की कार्यप्रणाली में जवाबदेही लाएगा। साथ ही, केंद्र सरकार के विधि अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट होने से नीतिगत फैसलों में विवाद कम होंगे। ऑयल इंडिया के मामले में भी अदालत ने प्रक्रियात्मक निष्पक्षता का ध्यान रखा है। फैसले के बाद बीसीआई ने कहा कि वह अदालत के निर्देशों का पालन करेगी और जल्द ही नई प्रक्रिया तैयार करेगी। वहीं, ऑयल इंडिया के प्रवक्ता ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कंपनी जल्द ही नई याचिका दायर करेगी। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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