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सुप्रीम कोर्ट ने कहा – शादी के बाद भी पत्नी की सहमति खत्म नहीं होती

9/9/2026, 1:38:06 am
सुप्रीम कोर्ट ने कहा – शादी के बाद भी पत्नी की सहमति खत्म नहीं होती
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सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक दुष्कर्म के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा कि शादी के बाद भी पत्नी की सहमति का अधिकार खत्म नहीं होता। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद 2 को चुनौती दी थी, जो पति को पत्नी के साथ जबरन संबंध बनाने पर अपराध नहीं मानता। बेंच ने कहा कि संविधान प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा, स्वायत्तता और शारीरिक अखंडता का अधिकार देता है। विवाह इस अधिकार को छीन नहीं सकता। केंद्र सरकार से अदालत ने पूछा कि इस अपवाद को बनाए रखने का क्या संवैधानिक आधार है। सरकारी वकील ने सामाजिक स्थिरता और पारिवारिक ढांचे का हवाला दिया। मगर अदालत ने इसे संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध माना और कहा कि किसी भी कानून के तहत बलात्कार को वैध नहीं ठहराया जा सकता। इस टिप्पणी का असर लाखों महिलाओं पर पड़ेगा जो लंबे समय से न्याय की आस में हैं। महिला अधिकार संगठनों, विधि आयोग और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों ने इस रुख का स्वागत किया है। उन्होंने संसद से मांग की है कि जल्द से जल्द कानून में संशोधन किया जाए ताकि वैवाहिक दुष्कर्म को स्पष्ट अपराध माना जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं की है और मामला विचाराधीन है। इससे पहले 2013 में भी सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध मानने से इनकार किया था, लेकिन तब अदालत ने विधि आयोग से सुझाव मांगे थे। 2019 में विधि आयोग ने अपनी 247वीं रिपोर्ट में इस अपवाद को हटाने की सिफारिश की थी। संयुक्त राष्ट्र की CEDAW संधि भी भारत से इस कानून को बदलने की अपील करती रही है। कई राज्य सरकारों ने अपने स्तर पर महिला सुरक्षा कानूनों को मजबूत किया है, पर केंद्रीय कानून अब भी वही है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को संसद में उठाने का वादा किया है, जबकि सत्ताधारी दल ने अभी तक कोई ठोस पहल नहीं दिखाई। सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि कानून बदलने से ही नहीं, पुलिस और अदालतों की संवेदनशीलता भी बढ़ानी होगी। अगले कुछ महीनों में इस मामले पर बड़ा फैसला आ सकता है, जो भारतीय नारीवाद की दिशा तय करेगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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